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बिहार में सियासी हलचल तेज: आज CM आवास पर बड़ी बैठक, 14 अप्रैल को इस्तीफे के संकेत

बिहार में सियासी हलचल तेज: आज CM आवास पर बड़ी बैठक, 14 अप्रैल को इस्तीफे के संकेत

पटना। दीपक कुमार तिवारी। बिहार की राजनीति इन दिनों उफान पर है। नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है। इसी बीच रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें जदयू के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों की संख्या और विभागों के बंटवारे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के भी पटना पहुंचने की जानकारी है। वहीं, शनिवार देर रात दोनों डिप्टी सीएम ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सियासी हालात पर चर्चा की।
बीते दिन की बैठक के बाद एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई, जब 1 अणे मार्ग से सामान 7 सर्कुलर रोड शिफ्ट होता नजर आया। इससे सियासी अटकलों को और बल मिला है कि सत्ता में बड़ा बदलाव होने वाला है।
सूत्रों का कहना है कि 13 या 14 अप्रैल को मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वहीं, 14 अप्रैल को नीतीश कुमार द्वारा राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने की चर्चा है। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन किया जाएगा और 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है।


राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इस बार एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव हो सकता है। जदयू को डिप्टी सीएम पद मिलने के साथ दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संभावित नामों में निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है, जिसे भविष्य के नेतृत्व के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, पहली बार बीजेपी कोटे से बिहार में मुख्यमंत्री बनने की भी अटकलें हैं।
शनिवार को डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, मंत्री लखेंद्र पासवान, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर नए मंत्रिमंडल के स्वरूप और युवा चेहरों को शामिल करने पर चर्चा की।

राज्यसभा सांसद बने नीतीश कुमार:

गौरतलब है कि 10 अप्रैल को नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है। उन्हें उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शपथ दिलाई। इसके साथ ही वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और विधान परिषद—चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं।
फिलहाल, बिहार की राजनीति में अगले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं, जो राज्य की सियासी दिशा तय कर सकते हैं।