-बिहार में खेल क्रांति की तैयारी: डुमरी स्पोर्ट्स सिटी, जिला उत्कृष्टता केंद्र और खिलाड़ियों को नौकरी पर बड़ा फैसला
पटना, 11 जून 2026। बिहार में खेलों के विकास को नई गति देने के उद्देश्य से खेल मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को विकास भवन, पटना में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की खेल अवसंरचना परियोजनाओं, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, रोजगार और भावी खेल कार्ययोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में बिहार की महत्वाकांक्षी डुमरी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना के लिए 574 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि से संबंधित प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जा चुका है। खेल मंत्री ने कहा कि डुमरी स्पोर्ट्स सिटी बिहार के खेल विकास का नया केंद्र बनेगी और इसके आसपास खेल उद्योग तथा प्रशिक्षण सुविधाओं का व्यापक विस्तार होगा।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अहमदाबाद और ओडिशा के खेल मॉडल का अध्ययन कराया गया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने तथा परियोजना की मासिक समीक्षा करने के निर्देश दिए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि अरवल, मधेपुरा और किशनगंज के जिला उत्कृष्टता केंद्रों का संचालन 15 जून से शुरू किया जाएगा। इन केंद्रों में क्रमशः कबड्डी, बैडमिंटन और ताइक्वांडो का आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं सिवान, मुंगेर और जमुई में फुटबॉल उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जाएंगे।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रन शंकरण ने बताया कि खिलाड़ियों के चयन और प्रशिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है तथा सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि 30 सितंबर 2026 तक राज्य के सभी जिला उत्कृष्टता केंद्र पूरी तरह संचालित हो जाएं।
बैठक में पंचायत स्तर पर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्पोर्ट्स क्लबों को सक्रिय करने और खेल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि राज्य की 8,053 पंचायतों में से 4,700 पंचायतों में 5,266 खेल मैदान तैयार किए जा चुके हैं, जबकि शेष पंचायतों में भी प्राथमिकता के आधार पर मैदान विकसित किए जाएंगे।
खिलाड़ियों को रोजगार देने के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। प्रस्ताव रखा गया कि ओलंपिक पदक विजेताओं के साथ-साथ भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीम के उन खिलाड़ियों को भी “मेडल लाओ, नौकरी पाओ” योजना में शामिल किया जाए, जिनका चयन बीसीसीआई की वरिष्ठ टीमों में हुआ हो। प्रस्ताव मंजूर होने पर ऐसे खिलाड़ियों को लेवल-9 की सरकारी नौकरी का लाभ मिल सकेगा।
बैठक में राज्य के खेल कैलेंडर की समीक्षा के दौरान नवंबर 2026 में राजगीर में भारत-न्यूजीलैंड रग्बी श्रृंखला, जुलाई-अगस्त में खेलो इंडिया अस्मिता महिला भारोत्तोलन प्रतियोगिता, 7 अगस्त को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस तथा दिसंबर 2026 में एफआईएच प्रो लीग के आयोजन की तैयारियों पर चर्चा की गई।
शिक्षा एवं खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि राज्य में 4,818 शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है तथा लगभग 17,000 शिक्षकों को योग प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित स्पोर्ट्स एक्शन प्लान में फिजिकल लिटरेसी रिपोर्ट कार्ड, वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान कार्यक्रम, फिट कैंपस चैलेंज, एकीकृत वेलनेस पोर्टल और खेल विनिर्माण हब जैसी पहल शामिल हैं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राजगीर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम पर 1,121 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
बैठक के अंत में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य को देश के अग्रणी खेल राज्यों में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने और खेल विकास के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने का निर्देश दिया।












