Advertisement

बिहार के लिए बजट का गणित: विकास या चुनावी रणनीति?

-बिहार के लिए बजट का गणित: विकास या चुनावी रणनीति?

दीपक कुमार तिवारी | नई दिल्ली/पटना

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए आम बजट 2025 में बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। मखाना बोर्ड की स्थापना, पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए वित्तीय सहायता और आईआईटी पटना के विस्तार जैसी योजनाएं राज्य के लिए बड़े आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का संकेत देती हैं। लेकिन सवाल उठता है—क्या यह बिहार के विकास का रोडमैप है, या फिर 2025 के विधानसभा चुनावों की बिसात पर चली गई एक रणनीतिक चाल?

मखाना बोर्ड: मिथिला के किसानों की जीत या राजनीतिक पैंतरा?

बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में मखाना की खेती को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा की है। जनता दल (यूनाइटेड) के संजय झा ने इसे किसानों के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया, जो उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को मजबूती देगा। वित्त मंत्री ने कहा कि मखाना किसानों को एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से संगठित किया जाएगा, जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

लेकिन विपक्ष इस घोषणा को अलग नजरिए से देख रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे चुनावी स्टंट करार देते हुए कहा, “बिहार को अचानक से घोषणाओं का खजाना क्यों मिल गया? जाहिर है, क्योंकि साल के अंत में वहां चुनाव हैं।”

पश्चिमी कोसी नहर परियोजना: किसानों के लिए राहत या वोट बैंक की मजबूती?

बिहार में सिंचाई की समस्या लंबे समय से किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई वित्तीय सहायता से 50,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को फायदा होगा। इससे मिथिलांचल के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम केवल सिंचाई समस्या हल करने से ज्यादा, कोसी और सीमांचल क्षेत्र के वोटरों को लुभाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

आईआईटी पटना का विस्तार: युवाओं के लिए अवसर या चुनावी एजेंडा?

शिक्षा के क्षेत्र में भी बिहार को बजट में जगह मिली है। आईआईटी पटना में छात्रावास और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का प्रावधान किया गया है। भाजपा इसे ‘युवाओं के लिए सुनहरा अवसर’ बता रही है, जबकि विपक्ष इसे ‘समयबद्ध घोषणाओं का खेल’ कहकर खारिज कर रहा है।

विपक्ष बनाम सत्ता पक्ष: बिहार को विकास क्यों खटक रहा है?

भाजपा के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा, “हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होते हैं, तो क्या विकास कार्य बंद कर देने चाहिए? यदि विपक्ष को आपत्ति है, तो ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव का समर्थन करें।”

वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने भी सवाल उठाया कि अगर बिहार को विकास परियोजनाएं मिली हैं, तो इसमें विपक्ष को आपत्ति क्यों हो रही है?

सीतारमण की साड़ी भी बनी चर्चा का विषय:

दिलचस्प बात यह रही कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिथिला पेंटिंग से सजी क्रीम कलर की साड़ी पहनकर बजट पेश किया। यह साड़ी उन्हें पद्मश्री दुलारी देवी ने भेंट की थी। इसे बिहार के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करने की कोशिश के रूप में भी देखा गया।

बिहार को फायदा या सियासी फायदा?

बजट में बिहार को मिली सौगातों ने राज्य में राजनीति को गर्मा दिया है। भाजपा और जदयू इसे बिहार के विकास का रोडमैप बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने की कोशिश मान रहे हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये घोषणाएं सिर्फ बजट भाषण तक सीमित रहती हैं या फिर बिहार की जमीनी हकीकत में बदलाव लाती हैं।

#BiharBudget2025 #ElectionStrategy #DevelopmentOrPolitics #Mithila #MakhanaBoard