-बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम, दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टला
पटना। बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने का रास्ता साफ हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में दीपक प्रकाश के गैर-विधायक रहते मंत्री बने रहने को लेकर उठे सवालों के बाद भाजपा नेतृत्व सक्रिय हुआ। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया, जिससे रिक्त हुई सीट पर दीपक प्रकाश को भेजने की तैयारी शुरू हो गई है। इसका उद्देश्य मंत्री पद से जुड़े संवैधानिक विवाद का समाधान करना माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायक निर्वाचित हुए थे, जिनमें उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी शामिल हैं। चुनाव के बाद पार्टी के भाजपा में विलय की चर्चाएं भी हुई थीं, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट कहा था कि उनके बेटे दीपक प्रकाश पूरे कार्यकाल तक मंत्री रहेंगे और यह निर्णय केवल उनकी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे एनडीए का है।

दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि किसी गैर-विधायक को एक ही विधानसभा कार्यकाल के दौरान सरकार बदलने के आधार पर दोबारा छह महीने तक मंत्री बने रहने की संवैधानिक छूट नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने बिहार सरकार से पूछा है कि बिना निर्वाचित हुए कोई व्यक्ति छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम केवल संवैधानिक विवाद को सुलझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आगामी चुनावों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी हैं। बिहार में कुशवाहा (कोइरी) समुदाय कई विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में भाजपा उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी को एनडीए में मजबूती से बनाए रखना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पहले उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा गया और अब उनके बेटे के मंत्री पद को सुरक्षित रखने के लिए विधान परिषद का रास्ता तैयार किया गया है।
हालांकि, यह राहत फिलहाल अस्थायी मानी जा रही है। यदि दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बनते हैं, तो उनका कार्यकाल केवल मार्च 2027 तक रहेगा, क्योंकि रिक्त हुई सीट का शेष कार्यकाल उतना ही बचा है। इसके बाद उन्हें दोबारा विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा, अन्यथा उनके मंत्री पद पर फिर संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में यह मामला कानूनी पहलुओं के साथ-साथ बिहार की बदलती राजनीतिक रणनीति और जातीय समीकरणों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।












