-बाढ़ से निपटने को प्रशासन अलर्ट, 418 राहत शिविर और 278 नावें तैयार
-डीएम ने दिए सख्त निर्देश
मुजफ्फरपुर, 25 जून 2026। जिले में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए जिलाधिकारी कुमार गौरव की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला से लेकर प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई और सभी अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।
बैठक में अपर समाहर्ता (आपदा) ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बाढ़ पूर्व तैयारियों और विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में बाढ़ आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। वर्तमान में 26,125 पॉलिथीन शीट्स उपलब्ध हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 15 सरकारी नावों के साथ 263 निजी नावों को भी चिन्हित किया गया है।
प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास की तैयारियां भी पूरी कर ली हैं। जिले में 418 राहत शिविर और 448 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जहां बाढ़ प्रभावित लोगों को आश्रय एवं भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।
बैठक में बताया गया कि आपदा संपूर्ति पोर्टल पर अब तक 5 लाख 54 हजार 843 संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों का पंजीकरण किया जा चुका है। इन सूचियों का सत्यापन और अद्यतन कार्य जारी है ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को त्वरित सहायता प्रदान की जा सके।
बचाव उपकरणों की समीक्षा में बताया गया कि जिले में 6 इनफ्लैटेबल मोटर बोट, 65 टेंट, एक महाजाल, एक इनफ्लैटेबल लाइटिंग सिस्टम, 20 लाइफ बॉय रिंग, 65 लाइफ जैकेट, दो जीपीएस सेट और पांच सैटेलाइट फोन उपलब्ध हैं। साथ ही 159 प्रशिक्षित गोताखोरों और 497 आपदा मित्रों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में बूढ़ी गंडक, गंडक और बागमती नदियों के कारण हर वर्ष बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके अलावा लखनदेई, करेह और बाया नदी के कारण भी कई इलाकों में जलजमाव की समस्या रहती है। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण विभाग के अभियंताओं को तटबंधों का नियमित निरीक्षण करने तथा जहां आवश्यकता हो वहां तत्काल सुदृढ़ीकरण कार्य कराने का निर्देश दिया। जिले के 147 स्लुइस गेटों की स्थिति संतोषजनक बताई गई और उनकी मरम्मत एवं ग्रिसिंग का कार्य जारी रहने की जानकारी दी गई।
डीएम ने सभी अंचलाधिकारियों और कनीय अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों के तटबंधों एवं कटावरोधी कार्यों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। साथ ही सभी नहरों के ड्रेनेज सिस्टम का समेकित नक्शा तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा।
पशु संसाधन विभाग की समीक्षा में बताया गया कि जिले के पशु चिकित्सालयों में 44 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। बाढ़ की स्थिति में पशुओं की देखभाल के लिए 38 पशु राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं तथा चारा और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
पेयजल व्यवस्था की समीक्षा के दौरान नल-जल योजना एवं हैंडपंपों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को नल-जल योजना एवं चापाकलों की कार्यशीलता की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही डीआरडीए में कंट्रोल रूम स्थापित कर नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए पर्याप्त मानव दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मेडिकल टीमों का गठन करने की जानकारी दी गई। वहीं बिजली, पथ निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग को भी आपदा के दौरान निर्बाध सेवा सुनिश्चित करने के लिए अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी कुमार गौरव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने, आपदा प्रबंधन की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करने तथा हर परिस्थिति के लिए पूरी तैयारी बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाढ़ के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अधिकारियों को “अलर्ट एंड एक्टिव मोड” में रहकर कार्य करना होगा।












