-बज्जिका भाषा के विकास हेतु मुजफ्फरपुर में संगोष्ठी, वक्ताओं ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव
मुजफ्फरपुर।
बज्जिका भाषा और बज्जिकांचल के सांस्कृतिक उत्थान को लेकर रविवार को मुजफ्फरपुर में एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने बज्जिका के समुन्नत विकास के लिए सरकार और समाज दोनों से गंभीर प्रयासों की मांग की।
प्रो. पवन कुमार मिश्र ने बिहार सरकार से बज्जिका आयोग की त्वरित स्थापना की मांग करते हुए कहा कि जब तक बज्जिका को संस्थागत समर्थन नहीं मिलेगा, इसका समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आकाशवाणी से सप्ताह में कम से कम दो दिन बज्जिका भाषा में समाचार प्रसारित होने चाहिए।
राजेश प्रसाद शाही ने सुझाव दिया कि बज्जिकांचल के साहित्यकार और राजनेता सभाओं में अपनी बात बज्जिका भाषा में रखें, ताकि इसका प्रयोग और प्रसार दोनों बढ़े। उन्होंने लोगों से पारिवारिक और सामाजिक बातचीत में भी बज्जिका अपनाने की अपील की।

अमिय भूषण ने कहा कि बज्जिकांचल की सभी सार्वजनिक बैठकों में वक्ता बज्जिका भाषा का अधिकतम प्रयोग करें। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी बज्जिका में संवाद को बढ़ावा देने की बात कही।
दिलीप कुमार ने सरकार से मांग की कि बज्जिका की पढ़ाई को प्राथमिक कक्षा से ही पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। वहीं, डॉ. रवींद्र कुमार ने कहा कि जब तक लोग अपनी बोलचाल में बज्जिका का इस्तेमाल नहीं करेंगे, इसका विकास अधूरा रहेगा।
राजेश कुमार चौधरी ने बज्जिका को रोजगारपरक बनाने और स्थानीय समाचार पत्रों में बज्जिका भाषा में नियमित कॉलम प्रकाशित करने की आवश्यकता बताई।
देवेन्द्र कुमार शर्मा ने चिंता जताई कि शहरीकरण के कारण बज्जिका भाषा को नुकसान पहुंचा है, हालांकि गांवों में यह अब भी जीवित है। उन्होंने पढ़े-लिखे वर्ग से बज्जिका के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम का समापन रमेश प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा आत्मीय धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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