Advertisement

प्री-बोर्ड में हुए थे फेल, पिता की एक बात ने बदली जिंदगी

-प्री-बोर्ड में हुए थे फेल, पिता की एक बात ने बदली जिंदगी

-आज मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी हैं मोहिबुल्लाह अंसारी

मुजफ्फरपुर। कभी 10वीं और 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले बिहार के सिवान निवासी आईपीएस अधिकारी मोहिबुल्लाह अंसारी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। पिता की एक सीख को जीवन का लक्ष्य बनाकर उन्होंने न सिर्फ आईआईटी दिल्ली तक का सफर तय किया, बल्कि देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा यूपीएससी पास कर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में स्थान हासिल किया। वर्तमान में वह मुजफ्फरपुर में सिटी एसपी के पद पर कार्यरत हैं।
मोहिबुल्लाह अंसारी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में उनका ध्यान पढ़ाई से ज्यादा शरारतों में रहता था। दोस्तों के बीच उनकी पहचान इतनी शरारती छात्र की थी कि लोग मजाक में उन्हें ‘मुसीबतउल्लाह’ कहकर पुकारते थे। पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन को लेकर परिवार भी चिंतित रहता था।
मोहिबुल्लाह अंसारी 10वीं और 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षाओं में असफल हो गए थे। इसी दौरान उन्होंने आईआईटी में पढ़ने का सपना देखना शुरू किया था। खराब रिजल्ट आने पर उनके पिता ने कहा, “आईआईटी जाने का सपना देख रहे हो, पहले पास होने लायक नंबर तो लेकर आओ।” पिता की यह बात उनके दिल को छू गई और उन्होंने इसे चुनौती नहीं, बल्कि प्रेरणा के रूप में लिया।


इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह बदलने का फैसला किया। पढ़ाई में अनुशासन लाया और आईआईटी-जेईई की तैयारी शुरू कर दी। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस दोनों परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। वर्ष 2011 में उन्हें आईआईटी दिल्ली में केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक में दाखिला मिला।
आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की, लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें एहसास हुआ कि उनका सपना कुछ और है। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और वर्ष 2015 में दिल्ली जाकर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
यूपीएससी की राह आसान नहीं थी। लगातार कई प्रयासों में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार वर्ष 2021 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 381 हासिल कर आईपीएस बनने का सपना पूरा कर लिया।
आज बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी मोहिबुल्लाह अंसारी मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी यह साबित करती है कि असफलता कभी अंतिम पड़ाव नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो हर चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है।