-पुराने लीची बागों में फिर लौटेगी बहार, वैज्ञानिकों ने बताए जीर्णोद्धार के आसान तरीके
मुजफ्फरपुर। जिले के लीची किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब पुराने और कम उत्पादन देने वाले लीची बागों को काटने की आवश्यकता नहीं होगी। वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से इन बागों का जीर्णोद्धार कर दोबारा बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र (एनआरसीएल) के वैज्ञानिक किसानों को इसके लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने लीची बागों में समय-समय पर छंटाई (प्रूनिंग), कैनोपी प्रबंधन और वैज्ञानिक ढंग से रखरखाव करने से पेड़ों की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। इससे न केवल फलों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कई किसान पुराने बागों में उत्पादन कम होने पर उन्हें हटाने का निर्णय ले लेते हैं, जबकि उचित तकनीक अपनाकर इन्हीं पेड़ों को फिर से फलदार बनाया जा सकता है। इसके लिए संतुलित पोषण, नियमित छंटाई, उचित सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दे रहे हैं, ताकि वे वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर अपने पुराने बागों को फिर से लाभदायक बना सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन उपायों को अपनाते हैं तो मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध लीची का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा।












