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पितरों की शांति के लिए तर्पण एवं पिंडदान का दौड़ जारी

-पितरों की शांति के लिए तर्पण एवं पिंडदान का दौड़ जारी

बन्दरा। दीपक।

क्षेत्र में तर्पण का दौर रोजाना जारी है। पितृ पक्ष तक यह क्रम जारी रहेगा। प्रखंड एवं आसपास के क्षेत्रों में नदी, पोखर एवं अन्य जलाशय स्रोतों पर प्रत्येक सुबह अपने पितरों को अर्पण करने एवं मृत आत्मा की शांति के लिए तर्पण का कार्य जारी है। बताया जाता है कि इस तर्पण का कार्य पिंडदान के साथ समाप्त होता है। पंडित संजय पाठक ने सकरी मन नदी में ग्रामीणों को तर्पण कराने के दौरान बताया कि पितृ पक्ष के आरंभ (28सितंबर) से इसकी शुरुआत हुई है। पितृ पक्ष समाप्ति तक यह कार्य कराया जाता है। लोग अपने पितरों एवं मृत आत्मा की शांति के लिए प्रत्येक साल विभिन्न जलास्यों, जल स्रोतों में जल अर्पण (तर्पण) करते हैं। जिसका समापन पिंडदान के साथ होता है। ऐसे में पितरों को शांति मिलती है।

उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है की मोक्षस्थल गया में जो अपने पितरों को तर्पण और पिंडदान करते हैं। उनके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, लेकिन जो लोग विभिन्न कारणों से गया जाने में असमर्थ हैं। वे लोग अपने-अपने इलाके के नदी, तालाब एवं अन्य जल स्रोतों से ही प्रत्येक साल अपने पूर्वजों को तर्पण करते हैं। समय अनुकूल होने के बाद समर्थ के अनुसार लोग गया जाकर भी तर्पण एवं पिंडदान करते हैं।