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नीतीश ने तरकश के हर तीर चला दिए पर लक्ष्य भेदने में हुए नाकामयाब, राजद विधायक सुधाकर ने पांच प्वाइंट्स में मुख्यमंत्री की खोल दी पोल

-नीतीश ने तरकश के हर तीर चला दिए पर लक्ष्य भेदने में हुए नाकामयाब, राजद विधायक सुधाकर ने पांच प्वाइंट्स में मुख्यमंत्री की खोल दी पोल

संवाददाता। पटना।

नीतीश कैबिनेट के पूर्व कृषि मंत्री व राजद विधायक सुधाकर सिंह सीएम नीतीश कुमार को लेकर हमलावर हैं. महागठबंधन की नई सरकार बनने के बाद सुधाकर सिंह को कृषि मंत्री बनाया गया था. मंत्री रहने के दौरान ही कृषि मामलों पर नीतीश कुमार की जो खिंचाई शुरू की वह आज भी जारी है. मुख्यमंत्री ने सुधाकर सिंह को पद छोड़ने पर विवश कर दिया था. इसके बाद तो वे और हमलावर हो गए हैं. हर दिन वे नीतीश कुमार की नीतियों खास कर कृषि नीति को कटघरे में खड़े कर रहे हैं. सुधाकर को साधने के लिए नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू ने तरकश के सभी तीर चला दिए, इसके बाद भी राजद विधायक को नियंत्रित नहीं कर सके. अब तो राजद विधायक ने चिट्ठी लिखकर सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनौती दे दी है. साथ ही आज यह भी ऐलान कर दिया कि बजट सत्र में एक बार फिर से बिहार में कृषि मंडी कानून के लिए निजी विधयेक पेश करने जा रहे हैं. सुधाकर ने मुख्यमंत्री को कहा कि इस बार अगले दरवाजे से आकर बहस के लिए तैयार रहिएगा। शीतकालीन सत्र में भी सुधाकर सिंह ने निजी विधेयक लगाया था लेकिन उसे रोक दिया गया था.

सुधाकर सिंह कृषि संबंधी विषयों को लेकर सीएम नीतीश पर हमलावर हैं. वे मुख्यमंत्री पर कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं. सुधाकर का मुंह बंद कराने को लेकर नीतीश कुमार ने राजद नेतृत्व पर दवाब डाला. इसके बाद राजद नेतृत्व की तरफ से सुधाकर सिंह को नोटिस दिया गया. सुधाकर ने नोटिस का जवाब भी दिया लेकिन नेतृत्व की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इधऱ, सुधाकर सिंह मुख्यमंत्री को घेरने का कोई मौका हाथ से नहीं निकलने दे रहे। इस बार तो बजाप्ता चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बखिया उधेड़ दी है. नीतीश कुमार को लिखे चिट्ठी में सुधाकर सिंह ने अपने आप जीरो जानकारी वाला विधायक बताया है. चिट्ठी में सुधाकर सिंह ने लिखा है कि प्रिय श्री नीतीश कुमार जी…। मेरे द्वारा किसानों के मुद्दे पर उठाए जा रहे सवालों पर कल आपके द्वारा दिए गए वक्तव्यों की जानकारी मिली।
राज्य सरकार के मुखिया का दायित्व होता है कम से कम बुनियादी स्तर की ईमानदारी और राज्य के लोगों के प्रति कर्तव्य निष्ठा रखना। पहले तो शक होता था कि आपमें इसकी कमी है मगर अब आपके द्वारा कही गई मनगढ़ंत बातों को सुनकर यही लगता है कि आपके राजनीतिक जीवन में कर्तव्य, निष्ठा और ईमानदारी का कोई अस्तित्व ही नहीं है। कोई नीतिगत मुद्दे पर तार्किक सवाल कर दे तो आपका एक ही घिसा-पिटा जवाब होता है कि सवाल पूछने वाले को कुछ नहीं पता है। खैर, आपके जैसे प्रकांड विद्वान के सामने हमारी क्या बिसात! चूंकि हर सवाल और हर मुद्दे पर आप यही राग अपनाए रहते हैं कि बहुत काम हुआ है इसलिए आप ही के सरकार के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के साथ बिहार की खेती किसानी से जुड़ी कुछ बातों का जिक्र कर रहा हूं।

सरकार द्वारा कृषि जमीन का सर्किल रेट 3,20,000 रुपए (तीन लाख बीस हजार रु) प्रति एकड़ तय किया गया है वहीं बिहार सीमा से सटे उत्तर प्रदेश राज्य का कृषि जमीन का सर्किल रेट 12,80,000 रुपए (बारह लाख अस्सी हजार रु) प्रति एकड़ है।
हमें पता है कि आपकी जानकारी, आंकड़ों और जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। हाल के दिनों आपने गफलत में रहने का नया शौक पाला है। निजी स्वास्थ्य पर शायद इसका कुछ ज्यादा असर न पड़े मगर लोकहित के लिए गफलत में रहना ठीक नहीं। इसलिए यह शौक जल्द से जल्द छोड़ दीजिए। और हां, आपकी एक बात से सहमत हूं की जनता मालिक है। अगामी चुनावों में अपने पसंद का कोई भी क्षेत्र चुन लिजियेगा, जनता इसका उदाहरण के साथ पुष्टि भी कर देगी कि बिहार के लोगों का आपसे भरोसा उठ चुका है और जनता वाकई मालिक है। आगामी बजट सत्र में एक बार फिर से बिहार में कृषि मंडी कानून के लिए निजी विधयेक पेश करूंगा। इस बार अगले दरवाजे से आकर बहस के लिए तैयार रहिएगा।