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निराला निकेतन में सजी काव्य गोष्ठी, कवियों ने गीत-ग़ज़लों से बांधा समां

-निराला निकेतन में सजी काव्य गोष्ठी, कवियों ने गीत-ग़ज़लों से बांधा समां

मुजफ्फरपुर।
प्रत्येक माह की भाँति महावाणी स्मरण के तत्वावधान में शहर के निराला निकेतन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें साहित्य प्रेमियों और कवियों की उपस्थिति से वातावरण काव्यमय हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य श्री जानकी बल्लभ शास्त्री जी के गीत “मेरे पथ में न विराम रहा” से हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. उषा किरण श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन उमेश राज ने किया।
इस अवसर पर डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह को निराला निकेतन का ट्रस्टी मनोनीत होने पर उपस्थित सभी साहित्यकारों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
काव्य पाठ की श्रृंखला में अरुण कुमार तुलसी ने “अक्सर सोचता हूँ मैं” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उमेश राज ने “चटक रंग टेसू सुमन मुस्काई” प्रस्तुत किया। भोजपुरी के वरिष्ठ गीतकार सत्येन्द्र कुमार सत्यन ने “गोकुल तजि श्याम कहाँ जात बानी…” से लोकभाषा का रस घोला। रामवृक्ष राम चकपुरी ने समसामयिक हालात पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत किया।


डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने “आपकी जिंदगी में मैं खुशियों का रंग भरना चाहता हूँ” से सकारात्मक संदेश दिया, वहीं दीन बंधु आजाद ने अपनी पंक्तियों से श्रोताओं का दिल जीता। अखिलेश्वर सिंह ने भगवान शिव की महिमा का बखान कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
रघुनाथ मुहब्बतपुरिया, प्रवीण कुमार (मैथिली कविता), उषा किरण श्रीवास्तव, अशोक भारती, अंजनी कुमार पाठक एवं डॉ. संगीता सागर ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से गोष्ठी को समृद्ध किया। डॉ. संगीता सागर की कविता ने नदियों के महत्व को खूबसूरती से रेखांकित किया।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी मोहन प्रसाद सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गोष्ठी ने साहित्य प्रेमियों को एक यादगार शाम प्रदान की।