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उत्तर बिहार में 27-28 अगस्त को बारिश के आसार, किसानों को फसलों की नियमित निगरानी की सलाह

-उत्तर बिहार में 27-28 अगस्त को बारिश के आसार, किसानों को फसलों की नियमित निगरानी की सलाह

समस्तीपुर/पूसा, 25 अगस्त। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र एवं ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने 26 से 30 अगस्त तक के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार 27-28 अगस्त के आसपास उत्तर बिहार के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। गोपालगंज, सीवान, वैशाली और पश्चिमी चंपारण के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश भी हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार पूर्वानुमान अवधि में अधिकतम तापमान 32 से 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता करीब 85 प्रतिशत तथा दोपहर में लगभग 50 प्रतिशत रह सकती है। इस दौरान मुख्य रूप से पूर्वी दिशा से 5 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
पूसा मौसम वेधशाला के अनुसार पिछले तीन दिनों में औसत अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। औसत सापेक्ष आर्द्रता सुबह 91 प्रतिशत और दोपहर में 82 प्रतिशत रही। इस अवधि में 49.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती लपेटक की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। प्रकोप दिखाई देने पर देर दोपहर के बाद अनुशंसित दानेदार दवा का खेत में समान रूप से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
मक्के की फसल में भी तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म के प्रकोप की आशंका को देखते हुए निगरानी करने को कहा गया है। तना छेदक का प्रकोप होने पर प्रभावित पौधों के गांठ वाले हिस्से में अनुशंसित दानेदार दवा डालने तथा फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
मौसम को फूलगोभी की खेती के लिए भी अनुकूल बताया गया है। किसानों को पूसा हिम ज्योति, डी-96 एवं पंत शुभ्रा जैसी किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी गई है। एक हेक्टेयर में बुवाई के लिए लगभग 350-400 ग्राम बीज की आवश्यकता होगी। खेत की तैयारी के दौरान अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद के साथ अनुशंसित मात्रा में पोषक तत्वों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।


भिंडी की फसल में लीफ हॉपर यानी हरा तेला के प्रकोप की आशंका जताई गई है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने तथा अधिक प्रकोप होने पर अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने वर्तमान मौसम को पपीते की बुवाई के लिए भी अनुकूल बताया है। किसानों को बीज उपचार के बाद पॉलीबैग में पौध तैयार करने और उचित अवस्था में खेत में रोपाई करने की सलाह दी गई है। उत्तर बिहार के लिए पूसा ड्वार्फ, पूसा नन्हा, पूसा डिलिशियस सहित अन्य अनुशंसित किस्मों का चयन किया जा सकता है।
टमाटर की शरदकालीन फसल के लिए भी बुवाई की सलाह दी गई है। किसानों को क्षेत्र और किस्म के अनुसार अनुशंसित दूरी रखते हुए पौध तैयार करने तथा रोपाई करने को कहा गया है। खेत में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा देने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम की परिस्थितियों में गाय और भैंस में लंपी स्किन डिजीज (LSD) का प्रकोप हो सकता है। तेज बुखार, शरीर पर गांठें, गांठों के फटने से घाव, लंगड़ापन, चारा-पानी का कम सेवन और दूध उत्पादन में कमी इसके प्रमुख लक्षण बताए गए हैं। पशुशाला की नियमित सफाई एवं कीटाणुशोधन, पशुओं की स्वच्छता और संतुलित आहार सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। प्रभावित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने को कहा गया है।
मौसम पूर्वानुमान एवं कृषि सलाह डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी की गई है।