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“आज दहशत है क्यों हवाओं में…” — नटवर साहित्य परिषद की मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा में बही साहित्य की सरिता

-“आज दहशत है क्यों हवाओं में…” — नटवर साहित्य परिषद की मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा में बही साहित्य की सरिता

मुजफ्फरपुर।
नटवर साहित्य परिषद के तत्वावधान में रविवार को शहर के छोटी सरैयागंज स्थित श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट भवन के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का भव्य आयोजन किया गया। साहित्यिक वातावरण से सजे इस आयोजन में नगर और आसपास के कई वरिष्ठ एवं नवोदित कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।

गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह ने की, जबकि मंच संचालन युवा कवि सुमन कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन परिषद के संयोजक डॉ. नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की रचनाओं के पाठ से हुई, जिनकी साहित्यिक विरासत को मंच पर स्मरण किया गया।
डॉ. नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी की पंक्तियां “आज दहशत है क्यों हवाओं में, आग कैसे लगी फिजाओं में…” ने समसामयिक परिस्थितियों को स्वर देते हुए खूब वाहवाही बटोरी।
युवा कवि सुमन कुमार मिश्र ने “मिले नहीं जो मन आपस में, नजर मिलाना बहुत कठिन है…” सुनाकर संवेदनाओं को झकझोरा।

वरिष्ठ कवि डॉ. हरीकिशोर प्रसाद सिंह की रचना “गुजरात में जन्म लिए जो भारत मां के लाल…” ने देशभक्ति की भावना को प्रबल किया।
भोजपुरी कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने अपनी लोकधुन “नदिया के पार दे उतार रे मलहा…” से सभागार में तालियों की गूंज भर दी।
अरुण कुमार तुलसी की “मधुर मिलन की आस लिए प्यास अभी अधूरी है…” और ओमप्रकाश गुप्ता की “मर्यादा के प्रतीक राम को मिलता है बनवास यहां…” जैसी रचनाएं सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन को स्वर देती रहीं।

कवि अशोक भारती, प्रमोद नारायण मिश्र, डॉ. जगदीश शर्मा, रामबृक्ष राम चकपुरी, मोहन कुमार सिंह, अंजनी कुमार पाठक, मुन्नी चौधरी, सविता राज, सिद्धि मोहन, हिंदलाल, नन्दकिशोर पोद्दार, सुरेन्द्र कुमार सहित अन्य कवियों की रचनाओं को भी खूब सराहा गया।

पूरे आयोजन में साहित्य प्रेमियों की भारी उपस्थिति रही और गोष्ठी ने कवियों और श्रोताओं के बीच एक गहरा जुड़ाव रच दिया।

– संवाददाता