-अधिकारी गायब, खाली रहीं कुर्सियां: राजापाकर के जन-कल्याण शिविर की खुली पोल
राजापाकर (वैशाली)। बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी जन-कल्याण अभियान के तहत प्रखंड मुख्यालय में आयोजित तीन दिवसीय प्रखंड सहयोग-सह-जन-कल्याण शिविर की अंतिम दिन की तस्वीरों ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से दावा किया गया था कि शिविर के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन गुरुवार को शिविर स्थल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आई।
शिविर परिसर में भव्य टेंट और लंबी कतारों में लाल प्लास्टिक की कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन पूरा पंडाल लगभग खाली पड़ा रहा। न तो लाभुकों की भीड़ दिखी और न ही उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकांश विभागीय अधिकारी मौजूद थे। शिविर स्थल पर सन्नाटा पसरा रहा और व्यवस्था के नाम पर केवल एक-दो चतुर्थवर्गीय कर्मी तथा कुछ विकास मित्र ही नजर आए।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन से चार एएनएम अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहीं, लेकिन अन्य प्रमुख विभागों के अधिकारी और कर्मी अनुपस्थित रहे। ऐसे में लोगों को आवेदन, निबंधन, सत्यापन, ई-केवाईसी सहित अन्य सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य अधूरा रह गया।
गौरतलब है कि 16 से 18 जून तक आयोजित इस शिविर के प्रचार-प्रसार में बड़े-बड़े दावे किए गए थे। पोस्टरों और विज्ञापनों के माध्यम से बताया गया था कि आम जनता को विभिन्न योजनाओं का लाभ और आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति और उदासीनता ने सरकार के “सबका सम्मान, जीवन आसान” नारे की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने शिविर की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित ही नहीं होने थे, तो सरकारी संसाधनों और धन का खर्च कर ऐसे आयोजन करने का क्या औचित्य है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।












