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CAG ने नीतीश राज की निकाली हवा ! बजट आकार ‘हाथी दांत’…खर्च ही नहीं कर पाती सरकार, जेंडर बजट का भी हाल बेहाल

-CAG ने नीतीश राज की निकाली हवा ! बजट आकार ‘हाथी दांत’…खर्च ही नहीं कर पाती सरकार, जेंडर बजट का भी हाल बेहाल

सम्वाददाता। पटना।

बिहार विधानसभा में आज वित्त मंत्री विजय चौधरी ने कैग का रिपोर्ट पेश किया. वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2022 तक सदन में पेश की गई रिपोर्ट में सरकार के वित्तीय प्रबंधन की पोल खुल गई है. नीतीश सरकार के बजट प्रबंधन की हवा निकल गई है. हर साल सरकार बजट के आकार में वृद्धि करती है लेकिन वह खर्च नहीं हो पाता. कैग रिपोर्ट ने एक बार फिर से नीतीश राज की पोल खोल कर रख दी है।

31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष का कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश किया गया है. जिसमें बताया गया है कि इस दौरान 25551 करोड रुपए का राजकोषीय घाटा दर्ज किया गया है, हालांकि यह घाटा विगत वर्ष की तुलना में 4276 करोड़ रुपए कम है. 2021-22 के दौरान राज्य को 2004-05 के बाद तीसरी बार राजस्व घाटे का सामना करना पड़ा था जो 422 करोड़ था. कोविड महामारी के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से जीवित करने वाले 10 शीर्ष राज्यों में बिहार तीसरे पायदान पर रहा. बिहार पांच वर्षों के दौरान उच्च स्तर पर जीएसडीपी दर्ज की है. वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान केंद्रीय करों के हिस्से और स्व कर राजस्व में वृद्धि के कारण राजस्व प्राप्ति में 30630 करोड रुपए यानी 23.90% की वृद्धि दर्ज की गई. सामाजिक सेवाओं में वृद्धि के कारण राजस्व व्यय में 19727 करोड़ की वृद्धि हुई. पिछले वर्ष की तुलना में परिसंपत्तियों के निर्माण पर व्यय में 30.03% की वृद्धि हुई।

वित्तीय प्रबंधन की बात करें तो राज्य सरकार ने 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान कुल बजट का प्रावधान 265396.87 करोड किया था. इसके विरुद्ध 19420 2.20 करोड़ यानी 73.17% ही खर्च किया. अनुपूरक प्रावधान 47 09 4.17 करोड़ पूरी तरह से बेकार हो गया,क्योंकि वह मूल प्रावधान के स्तर तक भी नहीं था।

जेंडर बजट में 73.22 करोड की निधि के बावजूद श्रेणी -ए की 17 योजनाओं में कोई खर्च नहीं किया गया. बाल कल्याण बजट की 33 योजनाओं में 942.87 करोड़ की निधि के बावजूद कोई खर्च नहीं हुआ. बिहार देश में हरित बजट तैयार करने वाला पहला राज्य है. 6 श्रेणियों के तहत 275 योजनाओं के लिए 7682.91 करोड़ का प्रावधान किया गया लेकिन समूह-ए के रूप में चिन्हित 74 योजनाओं में से 16 योजनाओं में कोई खर्च नहीं किया गया।