-मिथिला का पंद्रह दिवसीय परिक्रमा सोमवार से प्रारंभ
जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर।
मिथिला का पंद्रह दिवसीय परिक्रमा सोमवार से से प्रारंभ हुयी है। धनुषा जिला के कचुरी से राम का डोला गाजे के साथ महंथ राम नरेश शरण की अगुवाई में प्रारंभ हुयी। मौके पर मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सरोज यादव, वन, उद्योग तथा पर्यटन मंत्री सुनीता यादव, जनकपुर वृहत्तर क्षेत्र विकास परिषद के अध्यक्ष शीतल साह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर सुरक्षा कर्मी की जवानों ने पंचम बाजा की धुन बजायी। हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वृष्टि का डोला का जगह जगह स्वागत किया। रास्ते में जगह जगह महिलाओं ने छत से फूल अक्षत फेंक कर डोला का नमन किया। डोला जानकी मंदिर दर्शन केबाद रत्न सागर कुछ समय बिश्राम किए फिर डोला हनुमान गढी पहुंची। हनुमान गढी में डोला का स्वागत जनकपुरधाम के उप महानगर पालिका के मेयर मनोज कुमार साह ने की। रात्रि विश्राम के बाद मंगलवार को डोला कलना (बिहार) पहुंचेगी। वहां विश्राम के बाद बुधवार को राम का डोला तथा सीता (किशोरी जी) का डोली फूलहर (गिरिजा स्थान) के लिए प्रस्थान करेगी। फूलहर के बाद डोला मटिहानी (नेपाल) में आयेगी। मटिहानी के बाद जलेश्वर केबाद मड़ै, ध्रुव कुण्ड, कंचन वन, पर्वता, धनुषा धाम, सतोखर, औरही, करुणा, विश्वामित्र आश्रम बिसौल के बाद डोला कलना होते हुए जनकपुरधाम पहुंचेगी। 7मार्च को गृह परिक्रमा (पंचकोशी) परिक्रमा का समापन होगा।

15दिवसीय परिक्रमा में चार पड़ाव कलना, गिरिजा स्थान (फूलहर) करूणा तथा बिसौल भारत मेंहै। शेष नेपाल में हैं। पंद्रह दिवसीय परिक्रमा में 133किलो मीटर दूरी तय करना पड़ता है। परिक्रमा अयोध्या, काशी, मथुरा, हरिद्वार सहित नेपाल तथा भारत के साधु-संत नागा तथा हजारो की संख्या में गृहस्थ शामिल होते हैं। प्रत्येक पड़ाव पर यात्रियों के ठहरने के लिए पेयजल, रोशनी, स्वास्थ्य शिविर तथा सुरक्षा का बंदोबस्त स्थानीय लोग तथा सरकार द्वारा की जाती है। साधु-संतो के राशन तथा जलावन की व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर किया जाता है।














