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जनहित के मामलों का तत्परता से करें समाधान, विभागों में बेहतर समन्वय स्थापित करें : डीएम

-जनहित के मामलों का तत्परता से करें समाधान, विभागों में बेहतर समन्वय स्थापित करें : डीएम

मुजफ्फरपुर, 5 सितंबर। जिलाधिकारी कुमार गौरव की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय में जिला समन्वय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के कार्यों एवं विकासात्मक योजनाओं की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी पदाधिकारियों को अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित कर आम जनता से जुड़े मामलों का संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ समाधान करने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी ने कहा कि लोक-कल्याणकारी एवं विकासात्मक योजनाओं का सफल, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभागों के अधिकारी सरकार के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि समन्वय समिति की बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का त्वरित समाधान करना है। किसी भी विभाग के स्तर पर समस्या उत्पन्न होने पर संबंधित अधिकारी आपसी संवाद और समन्वय के माध्यम से उसका शीघ्र समाधान करें।

बैठक के दौरान आईसीडीएस के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण, प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड के तरकारी आउटलेट, स्वास्थ्य उपकेंद्रों समेत विभिन्न योजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किया गया। जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर अंचल अधिकारियों के माध्यम से सभी योजनाओं के लिए शीघ्र उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े। क्षेत्र में पदस्थापित अधिकारी जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह रहें। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्य-संस्कृति को और मजबूत करने के लिए प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों को रिस्पॉन्सिव होना होगा।

बैठक में आईसीडीएस की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में कुल 17 बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत 5,617 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जिलाधिकारी ने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युत आपूर्ति, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश डीपीओ, आईसीडीएस को दिया। प्रत्येक परियोजना में 20 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित है। इस प्रकार कुल 340 भवनों का निर्माण किया जाना है, जिनमें 185 भवनों के लिए जमीन पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। शेष केंद्रों के लिए भी जल्द भूमि और एनओसी उपलब्ध कराने का निर्देश अंचल अधिकारियों को दिया गया।

जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए वित्तीय वर्षवार प्रतिवेदन तैयार कराने तथा संबंधित विभागों के साथ नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। निर्माणाधीन भवनों को निर्धारित समय सीमा में पूरा कराने को भी कहा गया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन, गोदभराई एवं वीएचएसएनडी कार्यक्रमों का प्रावधानों के अनुसार आयोजन कराने तथा केंद्रों का लगातार निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में मिशन कायाकल्प की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से मौजूद आधारभूत संरचनाओं एवं परिसंपत्तियों को मजबूत करने तथा नई परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए मिशन कायाकल्प शुरू किया जा रहा है। इसके तहत विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, सामुदायिक भवनों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों के सुदृढ़ीकरण, उन्नयन एवं नवनिर्माण समेत अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल होंगी। उन्होंने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को ग्राम पंचायतवार प्राथमिकता के आधार पर करीब 10 योजनाओं का तत्काल चयन करने का निर्देश दिया। अपर समाहर्ता को संबंधित योजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।

जीविका की समीक्षा के दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से मुजफ्फरपुर में जीविका इम्पोरियम का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में 600 से 1000 वर्गफीट के उपयुक्त परिसर की आवश्यकता है। जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को उपयुक्त परिसर चिन्हित करने की कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार की महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसके लिए मुजफ्फरपुर और गया जिले का चयन किया गया है।

सहकारिता विभाग की समीक्षा में बताया गया कि नौ प्रखंडों में तरकारी आउटलेट निर्माण के लिए चयन किया गया है। कटरा और सरैया में भूमि उपलब्ध है, जबकि शेष सात अंचलों में भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश जिलाधिकारी ने संबंधित अंचल अधिकारियों को दिया। पंचायत स्तरीय सब्जी संग्रहण केंद्र के निर्माण के लिए छह प्रखंडों का चयन किया गया है, जिसके लिए करीब 700 वर्गफीट भूमि की आवश्यकता है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को भूमि उपलब्ध कराने में तेजी लाने का निर्देश दिया।

बैठक में राशन कार्ड निर्माण की भी समीक्षा हुई। बताया गया कि नए राशन कार्ड के लिए 76,051 आवेदनों की डाटा एंट्री पूरी हो चुकी है। जिलाधिकारी ने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों एवं बीडीओ को मिशन मोड में ई-केवाईसी और राशन कार्ड निर्माण का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं की भी समीक्षा की। बताया गया कि 29 अगस्त से 3 सितंबर के बीच 12,363 पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण किया गया है।

पंचायती राज विभाग की समीक्षा में बताया गया कि पिछले करीब चार माह में 17 पंचायत सरकार भवनों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित कर क्रियाशील किया गया है, जबकि 41 अन्य पंचायत सरकार भवनों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। विभिन्न पंचायतों में 29 कन्या विवाह मंडपों का निर्माण भी प्रक्रियाधीन है। जिले में सड़क, पुल-पुलिया और फ्लाईओवर समेत करीब 40 निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं।

जिलाधिकारी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की। बताया गया कि पोखरैरा, राजवाड़ा, बोचहां और मुरौल में चार अंबेदकर आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें कुल 1,116 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इन विद्यालयों में आवासन, अध्ययन, भोजन समेत विभिन्न सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। पारू, मोतीपुर, सकरा, बंदरा और कुढ़नी में पांच अतिरिक्त आवासीय विद्यालयों की स्वीकृति दी गई है, जिनका निर्माण विभिन्न चरणों में है।

बैठक में समरसता संकल्प अभियान के तहत अनुसूचित जाति टोलों में संत रविदास विकास शिविरों के आयोजन और प्राप्त आवेदनों का निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

जिला उद्योग केंद्र की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना का लक्ष्य के अनुरूप बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। लाभुकों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय किस्त का भुगतान नियमानुसार समय पर करने को कहा गया।

लोक शिकायत निवारण और आरटीपीएस मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी लोक प्राधिकारों एवं अधिकारियों को आवेदनों का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केवल शिकायतों का निष्पादन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता की संतुष्टि सर्वोपरि है। लोक शिकायतों की सुनवाई में संबंधित लोक प्राधिकारों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

आरटीपीएस की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि एक्सपायर्ड मामलों की संख्या हर हाल में शून्य रहनी चाहिए। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 और बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। सहयोग पोर्टल, सीपीग्राम, जिला जनता दरबार समेत विभिन्न माध्यमों से प्राप्त आवेदनों का भी त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।

अंचल अधिकारियों और थानाध्यक्षों की संयुक्त बैठक की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि विवादों के समाधान में ऐसी बैठकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक सप्ताह अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष की संयुक्त बैठक आयोजित कर भूमि विवादों का समाधान करें और इसकी जानकारी भू-समाधान पोर्टल पर अपलोड करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण, आधारभूत संरचना, ग्रामीण विकास और नगर विकास समेत सभी क्षेत्रों में सरकार का विशेष ध्यान है। प्रशासन का उद्देश्य पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने सभी अधिकारियों को सजग, तत्पर और प्रतिबद्ध रहकर कार्य करने का निर्देश दिया।

बैठक में नगर आयुक्त, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ, सीडीपीओ, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।