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नितिन गडकरी के बयान से सियासी संन्यास की अटकलें, कार्यालय ने बताया असली संदर्भ

-नितिन गडकरी के बयान से सियासी संन्यास की अटकलें, कार्यालय ने बताया असली संदर्भ

नागपुर। काटोल में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में उनके बयान को राजनीति से दूरी बनाने के संकेत के तौर पर देखा जाने लगा। हालांकि, गडकरी के कार्यालय ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि बयान का राजनीति से कोई संबंध नहीं था।

गडकरी के कार्यालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि मंत्री की टिप्पणी ‘लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट’ के कामकाज और उसके भविष्य के नेतृत्व को लेकर थी। नितिन गडकरी इस ट्रस्ट के संस्थापक हैं। ट्रस्ट के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में एकल विद्यालय संचालित किए जाते हैं। ऐसे में उनके बयान का संदर्भ सामाजिक संस्था के भविष्य और नेतृत्व से जुड़ा था, न कि सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने से।

गडकरी के बयान के बाद एक बार फिर उनके ‘राजनीतिक संन्यास’ को लेकर चर्चा शुरू हुई है। इससे पहले सितंबर 2023 में महाराष्ट्र के वाशिम जिले में एक सड़क उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान भी उनके बयान को लेकर ऐसी ही अटकलें सामने आई थीं। उस दौरान उन्होंने पोस्टर-बैनर नहीं लगवाने और चाय-पानी नहीं कराने की बात कहते हुए लोगों से अपनी इच्छा के अनुसार मतदान करने की बात कही थी। उनके इस बयान को भी उस समय राजनीति से दूरी बनाने के संकेत के तौर पर देखा गया था।

हालांकि, बाद में गडकरी ने स्पष्ट किया था कि राजनीति छोड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है। उनकी बेबाक बयानबाजी और स्पष्ट राय रखने की शैली के कारण कई बार उनके सार्वजनिक बयानों के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जाते रहे हैं।

इस बार भी उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया, लेकिन कार्यालय की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण ने तस्वीर साफ कर दी है। फिलहाल गडकरी के राजनीति छोड़ने की कोई पुष्टि नहीं हुई है और उनके ताजा बयान का संबंध सामाजिक संस्था के कामकाज, नेतृत्व और भविष्य की दिशा से बताया गया है।