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मुजफ्फरपुर: तत्काल टिकट फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, कई राज्यों में फैला जालसाजों का नेटवर्क

-मुजफ्फरपुर: तत्काल टिकट फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, कई राज्यों में फैला जालसाजों का नेटवर्क

मुजफ्फरपुर। रेलवे के तत्काल टिकट में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि दूसरे राज्यों के रेलवे स्टेशनों से तत्काल टिकट जारी दिखाकर बिहार के विभिन्न जिलों के यात्रियों के नाम पर टिकट काटे जा रहे थे। इन टिकटों की प्रिंटिंग अधिकृत रेलवे काउंटर के बजाय दूसरी जगहों पर कर दो से तीन गुना अधिक कीमत वसूलकर यात्रियों को बेचा जा रहा था। शुक्रवार को पवन एक्सप्रेस के एसी कोच में दो तत्काल टिकट पर यात्रा कर रहे आठ यात्रियों के पकड़े जाने के बाद इस संगठित गिरोह का खुलासा हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि टिकट रेलवे के अधिकृत काउंटर से प्रिंट नहीं किए गए थे। इसके बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब इस बात की भी जांच की जा रही है कि टिकट प्रिंट करने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष कागज कहां से उपलब्ध कराए गए। बिहार के प्रमुख स्टेशनों से मुंबई, दिल्ली और कोलकाता जैसी ट्रेनों में तत्काल टिकट की भारी मांग का फायदा उठाकर जालसाज लंबे समय से इस धंधे को अंजाम दे रहे हैं। जांच एजेंसियों को इस पूरे मामले में कुछ रेलकर्मियों की भूमिका पर भी संदेह है।
समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा को मिले खुफिया इनपुट के बाद विशेष जांच अभियान शुरू किया गया। तीन दिनों के भीतर दो बड़े मामले सामने आए। पहले समस्तीपुर स्टेशन पर पवन एक्सप्रेस से दो महिला और दो पुरुष संदिग्ध टिकट के साथ पकड़े गए। इसके बाद शुक्रवार को उसी ट्रेन में आठ और यात्री टेंपरिंग किए गए तत्काल टिकट पर सफर करते मिले। इससे साफ हो गया कि यह किसी एक दलाल का नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले एक बड़े नेटवर्क का काम है।


समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर में मामला सामने आने के बाद इसकी सूचना सोनपुर रेल मंडल को दी गई। इस दौरान टीटीई राकेश सिंह को कुछ टिकट संदिग्ध लगे, जिसके बाद सहायक वाणिज्य प्रबंधक नीरज कुमार भी मौके पर पहुंचे। जांच में बी-2 और बी-4 एसी कोच में यात्रा कर रहे आठ यात्रियों के टिकटों में गंभीर गड़बड़ी मिली। टिकट महाराष्ट्र के पूर्णा और तेलंगाना के सिद्धपेट स्टेशन से जारी दिखाए गए थे, लेकिन उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से मंगवाकर दरभंगा में बैठे जालसाजों ने प्रिंट किया और यात्रियों को अधिक कीमत लेकर बेच दिया।
सभी संदिग्ध टिकट और यात्रियों के मोबाइल जब्त कर आरपीएफ हाजीपुर को सौंप दिए गए। इसके बाद मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत जीआरपी को सौंपा गया। जीआरपी हाजीपुर के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार की पूछताछ में पता चला कि कुछ टिकटों पर झारखंड के टोरी स्टेशन का नाम अंकित था, जबकि कई टिकटों से जारीकर्ता स्टेशन का नाम पूरी तरह हटा दिया गया था, ताकि जांच एजेंसियां असली स्रोत तक नहीं पहुंच सकें। पहली नजर में ये टिकट पूरी तरह असली प्रतीत होते थे और सामान्य जांच में इनकी पहचान करना लगभग असंभव था।
पवन एक्सप्रेस में पकड़े गए टेंपरिंग किए गए टिकटों के मामले में चार लोगों के खिलाफ हाजीपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। दो टिकटों पर चार महिला और चार पुरुष यात्रा कर रहे थे। जांच के बाद महिलाओं को निर्दोष मानते हुए थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया, जबकि पुरुष आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
रेल एसपी बीणा कुमारी ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। इस फर्जीवाड़े में शामिल नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में रेलवे के किसी कर्मचारी की संलिप्तता तो नहीं है।