-बिहार में दौड़ेगी रैपिड रेल, पटना-मुजफ्फरपुर समेत चार कॉरिडोर पर शुरू हुई तैयारी
मुजफ्फरपुर। बिहार में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर राज्य में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस योजना के तहत पटना से मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, आरा और गयाजी तक 160 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से रैपिड रेल चलाने की योजना है। इसके लिए मौजूदा रेलवे लाइन से अलग समर्पित ट्रैक बिछाया जाएगा।
रैपिड रेल परियोजना के लागू होने के बाद पटना, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, वैशाली, सारण, जहानाबाद, गयाजी और भोजपुर समेत आठ जिलों के 16 छोटे-बड़े शहर तेज रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। इससे रोजाना नौकरी, पढ़ाई, इलाज और अन्य कार्यों के लिए राजधानी आने-जाने वाले लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।

राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में बिहार में चार रैपिड रेल कॉरिडोर विकसित करने की मंजूरी दी है। परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का संचालन करने वाली नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) को सौंपी गई है। डीपीआर तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार पटना से मुजफ्फरपुर रूट पर सोनपुर और हाजीपुर, पटना से आरा रूट पर दानापुर और बिहटा, पटना से गयाजी रूट पर मसौढ़ी और जहानाबाद तथा पटना से बेगूसराय रूट पर फतुहा, बख्तियारपुर, बाढ़, मोकामा और बरौनी के रास्ते रैपिड रेल का संचालन किया जाएगा।
डीपीआर तैयार करते समय यह भी अध्ययन किया जाएगा कि किन शहरों से सबसे अधिक यात्री प्रतिदिन पटना आते-जाते हैं। उसी आधार पर स्टेशनों का चयन किया जाएगा और उन्हें आसपास के प्रमुख सड़क मार्गों से जोड़ा जाएगा। साथ ही पटना, मुजफ्फरपुर, गयाजी और सोनपुर में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप तथा औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रैपिड रेल परियोजना से राजधानी पटना और आसपास के शहरों के बीच संपर्क और मजबूत होगा। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी, राजधानी पर आबादी का दबाव कम होगा और रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा व्यापार से जुड़े लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल की तर्ज पर यह परियोजना बिहार के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।












