-मुजफ्फरपुर का गौरव: 127 साल पहले रखी गई थी एल.एस. कॉलेज की नींव, शिक्षा के मंदिर ने देश को दिए राष्ट्रपति से लेकर कई महान व्यक्तित्व
मुजफ्फरपुर। दीपक कुमार तिवारी। उत्तर बिहार की शिक्षा का सबसे प्रतिष्ठित केंद्र माने जाने वाले लंगट सिंह कॉलेज (एल.एस. कॉलेज) का इतिहास त्याग, दूरदृष्टि और समाजसेवा की अद्भुत मिसाल है। 3 जुलाई 1899 को जिस संस्थान की नींव रखी गई थी, वह आज केवल एक महाविद्यालय नहीं, बल्कि उत्तर बिहार की शैक्षणिक और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। इस संस्थान ने देश को राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय कवि, सांसद, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद् और हजारों सफल विद्यार्थी दिए हैं।
इतिहास के अनुसार जनवरी 1899 में बाबू लंगट सिंह के प्रयासों से मुजफ्फरपुर में भूमिहार ब्राह्मण सभा का अधिवेशन आयोजित हुआ था। इस अधिवेशन में काशी नरेश महाराज प्रभुनारायण सिंह, दरभंगा महाराज, तमकुही नरेश, हथुआ महाराज, टेकरी नरेश, माझा स्टेट सहित कई प्रमुख जमींदार और विद्वान शामिल हुए। बैठक में मुजफ्फरपुर में एक डिग्री कॉलेज स्थापित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया और आर्थिक सहयोग का आश्वासन भी दिया गया।
हालांकि बाद में कुछ रियासतों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में कॉलेज स्थापित करने की योजना के कारण अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। इसके बाद बाबू लंगट सिंह ने मुजफ्फरपुर के प्रमुख जमींदारों की बैठक बुलाकर गरीब और ग्रामीण छात्रों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए हाई स्कूल और डिग्री कॉलेज दोनों की स्थापना का निर्णय लिया।

महाविद्यालय की स्थापना के लिए 22 सदस्यीय प्रबंध समिति का गठन किया गया। इसमें शिवहर नरेश शिवराज नंदन सिंह, हरदी के जमींदार बाबू कृष्ण नारायण सिंह, जैतपुर स्टेट के रघुनाथ दास, यदुनंदन शाही, महंथ परमेश्वर नारायण, महंथ द्वारिकानाथ तथा योगेंद्र नारायण सिंह सहित कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल थे।
सबसे महत्वपूर्ण योगदान बाबू लंगट सिंह का रहा, जिन्होंने अपने सरैयागंज स्थित लगभग 13 एकड़ भूखंड को विद्यालय और महाविद्यालय की स्थापना के लिए दान कर दिया। इसी भूमि पर 3 जुलाई 1899 को भूमिहार ब्राह्मण कॉलेजिएट स्कूल और भूमिहार ब्राह्मण कॉलेज की आधारशिला रखी गई। उल्लेखनीय है कि मात्र दो महीनों के भीतर भवन निर्माण, शिक्षकों की नियुक्ति और पढ़ाई की व्यवस्था पूरी कर ली गई।
समय के साथ यही संस्थान लंगट सिंह कॉलेज (एल.एस. कॉलेज) के नाम से प्रसिद्ध हुआ और उत्तर बिहार की उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। आज भी यह महाविद्यालय हजारों विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।
एल.एस. कॉलेज का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज के संपन्न लोग शिक्षा के लिए आगे आएं, तो आने वाली कई पीढ़ियों का भविष्य संवारा जा सकता है। बाबू लंगट सिंह और उनके सहयोगियों का यह अमूल्य योगदान सदैव इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज रहेगा।












