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मधेश के प्रथम सूर्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न, गंगासागर तट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

-मधेश के प्रथम सूर्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न, गंगासागर तट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। मधेश प्रदेश के प्रथम सूर्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा बुधवार देर शाम वैदिक विधि-विधान एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हो गई। जनकपुरधाम के ऐतिहासिक गंगासागर सरोवर तट पर निर्मित इस भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण छठ पूजा समिति गंगासागर द्वारा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से लगभग 60 लाख नेपाली रुपये की लागत से कराया गया है।
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के उपलक्ष्य में छठ पूजा समिति की ओर से एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मंदिर के उद्घाटनकर्ता जानकी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत श्री राम रोशन दास वैष्णव थे।
समारोह को संबोधित करते हुए महंत राम रोशन दास वैष्णव ने कहा कि जनकपुरधाम में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर पहले से मौजूद हैं, लेकिन सूर्य भगवान का मंदिर नहीं था। इस मंदिर के निर्माण से यह कमी भी पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार मधेश प्रदेश में सूर्य भगवान का यह पहला मंदिर है, जो जनकपुरधाम की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाएगा।


विशिष्ट अतिथि एवं जनकपुरधाम के पूर्व मेयर लाल किशोर साह ने कहा कि जनकपुरधाम का छठ महापर्व पूरे नेपाल में प्रसिद्ध है। यहां गंगासागर सरोवर में छठ व्रत करने के लिए बिहार समेत भारत के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। विदेशी पर्यटक भी जनकपुरधाम की भव्य छठ पूजा देखने आते हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान की पूजा प्रतिदिन की जाती है, लेकिन छठ पर्व के दौरान इसका विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है।
हरि नारायण गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद नेपाल, धनुषा जिला अध्यक्ष संतोष साह, छठ पूजा समिति के सचिव राम चंद्र पंजियार, कोषाध्यक्ष जगमोहन साह, सोनू निधि, रमण कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर सूर्य मंदिर निर्माण में 11 हजार रुपये या उससे अधिक सहयोग देने वाले दानदाताओं एवं कार्यसमिति के सदस्यों को प्रशस्ति-पत्र, अंगवस्त्र एवं रुद्राक्ष माला देकर सम्मानित किया गया।
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और जनसहभागिता के बीच संपन्न यह आयोजन जनकपुरधाम के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।