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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच शुरू, मांझी के बयान पर सियासी घमासान तेज

-भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच शुरू, मांझी के बयान पर सियासी घमासान तेज

पटना। भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुलिस के समक्ष हथियार डालते हुए बताए जा रहे वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया था। विपक्ष और सामाजिक संगठनों के दबाव के बीच सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए, वहीं संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
इधर, भरत तिवारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। एक पक्ष उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष उन्हें आदतन अपराधी करार दे रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर भरत तिवारी पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें आदतन अपराधी बताया है।
मांझी ने कहा कि यदि भरत तिवारी निर्दोष या सामान्य व्यक्ति थे तो उनके पास रिवाल्वर कैसे था और उन पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला कैसे दर्ज हुआ। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ ऐसे मामले हों, उसे पूरी तरह निर्दोष नहीं कहा जा सकता। मांझी ने दावा किया कि घटना के दिन भी पुलिस को खतरे की आशंका थी, इसलिए पुलिस की कार्रवाई उचित थी।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों में भय होना जरूरी है। मुख्यमंत्री द्वारा अपराध नियंत्रण को लेकर अपनाई जा रही सख्त नीति की भी उन्होंने सराहना की।

मांझी के बयान पर उठे सवाल:

मांझी के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि जिन लोगों को वे अपने करीबी और सलाहकार के रूप में रखते हैं, उनके खिलाफ भी विभिन्न गंभीर धाराओं में मामले दर्ज रहे हैं।
चर्चा का केंद्र बने मांझी के सलाहकार दानिश रिजवान का नाम भी इस विवाद में सामने आ रहा है। आरोप है कि उनके खिलाफ बिहार और झारखंड के विभिन्न थानों में कई मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, मारपीट तथा अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं। विरोधियों का तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामलों के आधार पर उसे आदतन अपराधी कहा जा सकता है, तो यही पैमाना अन्य लोगों पर भी लागू होना चाहिए।

हर्ष फायरिंग मामले में दर्ज हुई थी प्राथमिकी:

मार्च 2026 में भोजपुर जिले के आरा नगर थाना में दानिश रिजवान के खिलाफ कथित हर्ष फायरिंग के एक वायरल वीडियो को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो की जांच के बाद फायरिंग करने वाले व्यक्ति की पहचान दानिश रिजवान के रूप में की गई थी।
पुलिस का कहना था कि हर्ष फायरिंग एक संज्ञेय अपराध है, इसलिए विधिसम्मत कार्रवाई की गई। हालांकि दानिश रिजवान ने आरोपों से इनकार करते हुए वीडियो को पुराना और एआई जनरेटेड बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि इसी प्रकार के एक मामले में वर्ष 2017 में कार्रवाई हो चुकी है और उनका हथियार लाइसेंस भी रद्द किया जा चुका है।

न्यायिक जांच पर टिकी निगाहें:

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच पर टिकी हैं। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पुलिस कार्रवाई परिस्थितिजन्य थी या फिर कथित एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों में दम है। वहीं, मामले ने बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और दोहरे मानदंडों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।