-नीट पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़ा: मुजफ्फरपुर का मेडिकल छात्र निकला मास्टरमाइंड, सॉल्वर गैंग का बड़ा खुलासा
मुजफ्फरपुर। नीट पुनर्परीक्षा में हुए कथित फर्जीवाड़े की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, मुजफ्फरपुर के भगवानपुर स्थित यादव नगर निवासी और मगध मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस चौथे वर्ष के छात्र अर्पित सिंह ने सॉल्वर गैंग का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर परीक्षा में धांधली की साजिश रची थी। पुलिस ने उसे इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गया टाउन डीएसपी-2 धर्मेंद्र भारती एवं मगध मेडिकल थाना पुलिस ने ओल्ड बॉयज हॉस्टल स्थित अर्पित सिंह के कमरे में छापेमारी कर उसका इलेक्ट्रॉनिक टैब जब्त कर लिया। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस डिवाइस से फर्जीवाड़े से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं।

जांच में खुलासा हुआ है कि अर्पित सिंह ने मोटी रकम का लालच देकर नौ सॉल्वर्स को तैयार किया और उन्हें लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बैठाया। मुजफ्फरपुर के कांटी थाना क्षेत्र के हरचंदा गांव निवासी विवेक कुमार को गिरोह में मुख्य स्कॉलर के रूप में शामिल किया गया था। लखीसराय के केआरके उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर विवेक कुमार को दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए पकड़े जाने के बाद पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ शुरू हुआ।
पुलिस पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर लखीसराय के केआरके उच्च विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्रों से अर्पित द्वारा तैयार किए गए सभी नौ सॉल्वर्स को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इस साजिश को अंजाम देने में रंजित कुमार और रविशंकर ने भी सहयोग किया था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह ने बायोमेट्रिक जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए संबंधित निजी एजेंसी के कुछ कर्मियों और सुपरवाइजरों से कथित सांठगांठ की थी। आरोप है कि फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान छिपाने के लिए बायोमेट्रिक जांच में ढिलाई बरती गई और इसके बदले आर्थिक लाभ दिया गया।
पुलिस के अनुसार, पावापुरी स्थित मेडिकल संस्थान के छात्र रंजित कुमार ने अपने भाई को परीक्षा में पास कराने के लिए, जबकि फरार आरोपी रविशंकर ने अपनी पत्नी की जगह सॉल्वर बैठाने के लिए अर्पित सिंह से संपर्क किया था। जांच में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है।
फिलहाल अर्पित सिंह, विवेक कुमार और रंजित कुमार पुलिस की गिरफ्त में हैं, जबकि अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।











