-जनकपुर साहित्य महोत्सव का आगाज, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर जोर
मिश्रीलाल मधुकर।जनकपुर धाम।
जनकपुर साहित्य महोत्सव का तीन दिवसीय आयोजन गुरुवार से जनकपुरधाम स्थित महेंद्र नारायण निधि सभाकक्ष में शुरू हो गया। महोत्सव का उद्घाटन मधेश प्रदेश के गवर्नर डॉ. सुरेन्द्र लाभ ने किया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गवर्नर डॉ. सुरेन्द्र लाभ ने कहा कि जनकपुरधाम रामायण काल से ही साहित्य, कला और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि राजा जनक के दरबार में दुनिया भर के विद्वान शास्त्रार्थ करने आते थे, जहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता था। उन्होंने अष्टावक्र के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान और प्रतिभा के सामने शारीरिक सीमाएं भी मायने नहीं रखतीं।
उन्होंने कहा कि जनकपुर साहित्य महोत्सव विलुप्त होती साहित्यिक, सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को उजागर करने का महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसमें सांसद मनीष कुमार झा की उल्लेखनीय भूमिका है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद भारतीय वाणिज्य महादूतावास वीरगंज के वाणिज्य महादूत देवी सहाय मीणा ने कहा कि जिस देश की साहित्य, कला और संस्कृति मजबूत होती है, वह राष्ट्र उतनी ही तेजी से प्रगति करता है। उन्होंने भारत और नेपाल के बीच रामायण काल से चले आ रहे रोटी-बेटी संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हर क्षेत्र में नेपाल का सहयोग कर रहा है।
नेपाल के प्रसिद्ध उद्योगपति डॉ. उपेन्द्र महतो ने कहा कि विकसित देशों में लोग मशीनों की तरह जीवन जी रहे हैं और केवल धन अर्जन तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल भले ही अभी विकसित राष्ट्र नहीं है, लेकिन यहां लोगों के बीच आत्मीयता और शांति है।
मिथिला फाउंडेशन द्वारा आयोजित सप्तम संस्करण के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता अमित साह ने की। इस अवसर पर साहित्यकार एवं पत्रकार अशोक दत्त को अमित झा पुरस्कार के तहत एक लाख पांच हजार रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं वक्तृत्व कला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
समारोह में जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका के मेयर मनोज कुमार साह, प्रा. परमेश्वर कापड़ि, मिथिला विकास कोष के अध्यक्ष जीव नाथ चौधरी, साहित्यकार धीरेन्द्र प्रेमर्षि समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।















