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सम्राट कैबिनेट का महाविस्तार: 31 मंत्रियों ने ली शपथ, नए चेहरों और नए समीकरणों से बदली बिहार की सियासत

-सम्राट कैबिनेट का महाविस्तार: 31 मंत्रियों ने ली शपथ, नए चेहरों और नए समीकरणों से बदली बिहार की सियासत

पटना। बिहार की राजनीति गुरुवार को एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई, जब मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की सरकार में 31 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। राजधानी पटना के ऐतिहासिक Gandhi Maidan में आयोजित इस भव्य समारोह को सत्ता के बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी रहीं।

नई कैबिनेट में भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधते हुए मंत्रालयों का बंटवारा किया गया है। भाजपा कोटे से 14, जदयू से 13, लोजपा (रामविलास) से 2, हम से 1 और आरएलएम से 1 मंत्री को शामिल किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह विस्तार आगामी चुनावी रणनीति, जातीय समीकरण और गठबंधन की मजबूती को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

लोजपा (रामविलास) की ओर से Sanjay Singh और Sanjay Paswan को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं HAM की ओर से Santosh Suman और आरएलएम से Deepak Prakash को कैबिनेट में जगह मिली है।

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नए चेहरों की एंट्री को लेकर हो रही है। कई ऐसे नेताओं को मंत्री बनाया गया है, जो पहली बार सत्ता के शीर्ष गलियारों तक पहुंचे हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम Nishant Kumar का है, जिनकी कैबिनेट में एंट्री को बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी के उदय के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं शिवहर से विधायक Shweta Gupta भी पहली बार मंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं। पेशे से डॉक्टर और मूल रूप से सीतामढ़ी की रहने वाली श्वेता गुप्ता ने 2025 विधानसभा चुनाव में आरजेडी के Navneet Kumar को 31,398 वोटों के बड़े अंतर से हराकर राजनीतिक हलकों में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। इससे पहले इस सीट पर Chetan Anand का प्रभाव माना जाता था, लेकिन इस चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गए।

भाजपा खेमे से भी कई नए चेहरों को मौका मिला है, जिनमें Mithilesh Tiwari और Nand Kishore Yadav जैसे नाम प्रमुख हैं।

श्वेता गुप्ता की संपत्ति भी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनी हुई है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति करीब 28.4 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसमें 6.6 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 21.8 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह शपथ ग्रहण केवल मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए चेहरे, नई पीढ़ी, नए जातीय समीकरण और नई सियासी दिशा का स्पष्ट संकेत है।