-घर-घर जाकर हो रहा किसान निबंधन, नाम व जमीन दस्तावेजों की गड़बड़ी बनी किसानों की बड़ी परेशानी
राजापाकर-संजय श्रीवास्तव।
राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में किसानों के फार्मर रजिस्ट्रेशन (किसान निबंधन) को लेकर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पंचायत कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर भी निबंधन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। हालांकि रजिस्ट्रेशन के दौरान किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है।
प्रखंड की सभी पंचायतों में विकास मित्र, राजस्व कर्मचारी, पंचायत सचिव, कृषि सलाहकार एवं कृषि समन्वयक द्वारा पीएम किसान योजना से लाभान्वित किसानों का केवाईसी कराया जा रहा है। वहीं जिन किसानों का अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है, उनका फार्मर रजिस्ट्रेशन भी किया जा रहा है, ताकि उन्हें कृषि विभाग एवं सरकार की विभिन्न अनुदानित योजनाओं और अन्य लाभों का फायदा मिल सके।
कई किसानों ने बताया कि नाम में अशुद्धि और लगान रसीद में नाम के अंतर के कारण उनका लॉगिन कंप्यूटर व मोबाइल पर नहीं हो पा रहा है। रामबाबू सिंह, दिलीप कुमार, संतोष कुमार और मनोहर कुमार सहित अनेक किसानों का कहना है कि इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण वे किसान रजिस्ट्रेशन से वंचित रह जा रहे हैं। ऐसे दर्जनों किसान हैं, जिन्हें इसी तरह की समस्या झेलनी पड़ रही है।

इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जिनके नाम जमाबंदी या खतियान में दर्ज नहीं हैं। अधिकतर मामलों में जमीन अभी भी उनके पिता, दादा या परदादा के नाम पर अंकित है, जिनका निधन हो चुका है। कागजातों में वर्तमान पीढ़ी का नाम नहीं होने के कारण किसान निबंधन में भारी कठिनाई आ रही है।
किसानों ने इस समस्या को लेकर जिला पदाधिकारी वैशाली सहित कृषि विभाग और राजस्व विभाग के वरीय पदाधिकारियों से मांग की है कि जिन किसानों के नाम खतियान या रसीद में दर्ज नहीं हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि वे भी सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकें और उनका फार्मर रजिस्ट्रेशन संभव हो सके।
इधर भलुई पंचायत में कर्मचारी बलवीर कुमार एवं विकास मित्र संजीत कुमार, वहीं भाथादासी ग्राम में कर्मचारी मुनाजिर हुसैन और विकास समिति की सदस्य सरिता कुमारी द्वारा घर-घर घूमकर किसान रजिस्ट्रेशन का कार्य जोर-शोर से किया जा रहा है। पंचायत स्तर पर चल रहे इस अभियान से किसानों को सुविधा तो मिल रही है, लेकिन दस्तावेजी समस्याओं के समाधान की मांग अब और तेज हो गई है।














