गीत-ग़ज़लों की बयार में डूबी नटवर साहित्य परिषद की कवि गोष्ठी, श्रोताओं ने जमकर बजाई तालियाँ
मुजफ्फरपुर। साहित्य संवाददाता।
रविवार को मुजफ्फरपुर के छोटी सरैयागंज स्थित श्री नवयुवक समिति सभागार में नटवर साहित्य परिषद द्वारा आयोजित मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा में गीतों और ग़ज़लों की रसधार बहती रही। कार्यक्रम में शहर और आसपास के अनेक कवियों और शायरों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
वरिष्ठ कवयित्री डॉ. शैल केजरीवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस गोष्ठी का मंच संचालन युवा कवि सुमन कुमार मिश्र ने किया जबकि संयोजक डॉ. नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
गोष्ठी की शुरुआत आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के गीतों से हुई, जिसके बाद एक के बाद एक रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने “हम त जाइब हो बलमुआ…” सुनाकर माहौल में रस घोल दिया।
शायर डॉ. नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी की ग़ज़ल “मशवरा है ज़िन्दगी में आज़मा कर देखना…” को खूब सराहना मिली।

सुमन कुमार मिश्र की रचना “बरसो मेरे गाँव में जलधर…” ने तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी।
कवि सागर कुमार ने “दिल की बात दिलनशीं को कैसे कहता…” सुनाकर भावनाओं को छू लिया।
डॉ. जगदीश शर्मा, आचार्य चंद्र किशोर पाराशर, डॉ. शैल केजरीवाल सहित अन्य रचनाकारों की प्रस्तुतियाँ भी खूब सराही गईं।
कार्यक्रम में मुन्नी चौधरी, अरुण कुमार तुलसी, निश्चल कुमार नीरज, राजीवेन्द्र किशोर, अशोक भारती, मोहन प्रसाद सिन्हा, डा. हरिकिशोर प्रसाद सिंह, श्याम पोद्दार, पल्लव कुमार सुमन, अर्जुन कुमार, रमेश केजरीवाल जैसे अनेक साहित्यकारों की भी गरिमामयी भागीदारी रही।
कवि गोष्ठी ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुजफ्फरपुर की साहित्यिक ऊर्जा आज भी जीवंत और प्रेरणादायक है। गीतों और ग़ज़लों की इस शाम ने साहित्यप्रेमियों के दिलों को छू लिया।















