-मंगलामुखी किन्नरों के हाथों बनी सरस्वती की मूर्ति का अलग क्रेज
-ऑर्डर देने के लिए लग रही खरीदारों की भीड़
दीपक कुमार तिवारी।पटना/आरा।
शुभ समाचार और शुभ समारोह के अलावा खुशी के मौके पर नाच गाकर और उत्सव मना कर अपनी जीविका चलाने वाला मंगलामुखी किन्नर अब नये पेशे में हाथ आजमा रहे हैं। मंगलामुखी किन्नरों ने सरस्वती पूजा को लेकर मूर्ति निर्माण शुरू किया है। ट्रेन में यात्रियों से मांग कर खाने वाले, हमेशा किसी की खुशी में शामिल होकर अपनी रोजी रोटी चलाने वाले किन्नर मूर्ति गढ़ रहे हैं। सबसे खास बात ये है कि उनकी बनाई मूर्तियों की डिमांड काफी ज्यादा है।
भोजपुर जिले के बिहिया की रहने वाली मंगलामुखी किन्नर अब रोजगार के नए अवसर को तलाश चुकी हैं। ये लोग मां सरस्वती की मूर्तियां बना रही हैं। इनकी बनाई गई मूर्तियों का ऑर्डर भी मिल चुका है। भोजपुर जिले के बिहिया प्रखंड के बिहिया में रहने वाली मंगलामुखी किन्नरों की बनाई मूर्तियों के खरीदार भी आ गए हैं। ये मूर्तियां 3000 से लेकर 12000 तक में बेची जाएंगी।

पश्चिम बंगाल के मालदा की रहने वाली मंगलामुखी किन्नर बिहिया भोजपुर में आकर रस बस गई हैं। पहले ये लोग शादी विवाह के मौसम में आती थीं और नाच गान करके वापस चली जाती थीं। लेकिन अपनी लगन और कठिन परिश्रम के बदौलत ये लोग अब सरस्वती मां की मूर्तियां बना रही हैं। मंगलामुखी किन्नरों ने बताया कि नाचने और गाने से उनकी कमाई पूरी नहीं हो पाती है।
उन्होंने बताया कि उन्हें 6 महीने ही काम मिल पाता था और 6 महीने उनको बिना रोजगार के बैठना पड़ता था। इसलिए वे लोग सरस्वती जी की मूर्तियां बना रही हैं। ताकि इनको पैसे मिल सके। पश्चिम बंगाल की रहने वाली मंगलामुखी खुशी अनु पूर्ण, निशा तथा देवश्री की टीम मां सरस्वती की मूर्ति बनाने में लगी हुई है। बैठे रहते हुए उनके मन में ख्याल आया कि क्यों नहीं वे लोग सरस्वती पूजा के मौके पर मूर्ति का निर्माण शुरू करें। उनकी टीम ने पहले निर्माण सामग्री जुटाई और अब मूर्ति बना रही हैं। उनकी बनाई मूर्तियों को लोग पवित्र मानते हुए जमकर उसे खरीदने के लिए ऑर्डर दे रहे हैं।












