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रामायणकालीन मणिमंडप में सम्पन्न हुआ 35 जोड़ी का सामूहिक विवाह, मंत्रोच्चार के बीच वर-वधू बंधे परिणय सूत्र में

-रामायणकालीन मणिमंडप में सम्पन्न हुआ 35 जोड़ी का सामूहिक विवाह, मंत्रोच्चार के बीच वर-वधू बंधे परिणय सूत्र में

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर

जनकपुरधाम के वार्ड-13 स्थित पिड़ारी में अवस्थित रामायणकालीन प्राचीन मणिमंडप परिसर में बुधवार की रात भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया। ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 35 जोड़ी वर-वधू का विवाह वैदिक रीति-रिवाज के साथ सम्पन्न हुआ।

दोपहर दो बजे सभी जोडि़यों की नगर परिक्रमा गाजे-बाजे के साथ कराई गई। शाम होते ही सुसज्जित भव्य मंच पर स्वयंवर का आयोजन किया गया, जहां वर-वधू ने एक-दूसरे को अंगूठी पहनाकर वैवाहिक रस्म की शुरुआत की। इसके बाद पंडितों द्वारा बैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अठौगर की विधि सम्पन्न की गई।

कार्यक्रम में मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सरोज कुमार यादव, मंत्री लखन दास, मेयर मनोज कुमार साह, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुनाथ साह, धनुषा जिला अध्यक्ष संतोष कुमार साह, वार्ड-13 अध्यक्ष जीत बहादुर राउत, रामाशीष दास सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने भाग लेकर अठौगर विधि को सम्पन्न कराया।

इसके बाद सभी जोडि़यों का मिथिला परंपरा अनुसार कन्यादान किया गया। इसमें विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सदस्य तथा पतंजलि योग शिविर जानकी नगर के संचालक मनोहर साह, तमलोपा की वरिष्ठ नेत्री बिभा ठाकुर, कृषि वैज्ञानिक एवं अर्थशास्त्री सहित कई लोगों ने सहभागिता की।

सामूहिक विवाह में 20 से 35 वर्ष आयु वर्ग के दस जोड़ी विपन्न परिवारों के वर-वधू भी शामिल थे, जिनका विवाह अंतर्जातीय था। इन जोडि़यों की पहचान और संपर्क फेसबुक व पब्जी के माध्यम से हुई थी।

कार्यक्रम में सम्मिलित सभी वर-वधू को मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गैस चूल्हा, सिलेंडर, किचन सेट, बिस्तर, 15 साड़ियां, श्रृंगार सामग्री, दो चांदी की अंगूठी और दो आना सोने का मंगलसूत्र उपहारस्वरूप प्रदान किया गया।

विश्व हिंदू परिषद पिछले 6 वर्षों से इस तरह का सामूहिक विवाह आयोजन करती आ रही है। इस आयोजन में जनकपुरधाम उप-महानगरपालिका, प्रदेश सरकार और कई सामाजिक संगठनों ने सहयोग किया। वर-वधू के परिजनों के लिए भोजन और आवास की निःशुल्क व्यवस्था भी की गई थी।

इस भव्य सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन ने जनकपुरधाम को एक बार फिर मिथिला की समृद्ध परंपरा और लोक-आस्था की अनूठी मिसाल के रूप में स्थापित किया।