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योग से दिनचर्या शुरू करें आचार्य, तभी शिक्षा का उद्देश्य होगा सफल : ब्रह्माजी राव

-योग से दिनचर्या शुरू करें आचार्य, तभी शिक्षा का उद्देश्य होगा सफल : ब्रह्माजी राव

भागलपुर।25 मई 2026: भारती शिक्षा समिति बिहार एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति बिहार के तत्वावधान में आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग एवं सेवा स्थायित्व वर्ग के दूसरे दिन का कार्यक्रम सोमवार को उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव, विद्या भारती उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम एवं वर्ग के प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माजी राव ने कहा कि भारत गरीबी से प्रगति की ओर अग्रसर है और दिशा बदलने से ही देश की दशा बदलेगी। उन्होंने कहा कि एक आचार्य की दिनचर्या योग से प्रारंभ होनी चाहिए, क्योंकि योग व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।

उन्होंने विद्या भारती की विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना वर्ष 1952 में हुई थी। उन्होंने कहा कि समाज ही संगठन का आधार है। इस दौरान उन्होंने आचार्य प्रशिक्षण केंद्र, शिशु संगम, विद्वत परिषद, शिक्षा शोध संस्थान, एकल शिक्षक विद्यालय, बालिका शिक्षा, संस्कृति ज्ञान परीक्षा और संस्कृति महोत्सव जैसे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी भी दी।

क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य छात्रों में भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि छात्रों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए, जिससे वे शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनकर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।

प्रांतीय कार्यालय प्रमुख रामचंद्र आर्य ने हिंदी एवं अंग्रेजी सुलेख लेखन के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर पूर्णकालिक ब्रह्मदेव प्रसाद, उमाशंकर पोद्दार, धरणी कांत पांडे, लाल बाबू प्रसाद, वीरेंद्र कुमार, गंगा चौधरी, परमेश्वर कुमार, रमेश मणि पाठक, राकेश पांडे, जीवन राठौर, शंभू कुमार, सुशील कुमार, ममता जायसवाल, अनीता सिन्हा, राखी कुमारी, शशि भूषण मिश्र, सुधांशु कुमार सहित सभी प्रशिक्षणार्थी आचार्य उपस्थित रहे।