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मुजफ्फरपुर में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन पर प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित

-मुजफ्फरपुर में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन पर प्रमंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित

मुजफ्फरपुर, 11 मार्च 2026।
संयुक्त श्रम भवन, गन्नीपुर स्थित उप श्रम आयुक्त कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर के सभागार में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास हेतु राज्य रणनीति एवं कार्य योजना-2025 के तहत एक दिवसीय कार्यशाला/सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उप श्रम आयुक्त तिरहुत प्रमंडल नीरज नयन, सहायक श्रमायुक्त मुजफ्फरपुर राकेश रंजन, सहायक श्रमायुक्त बेतिया सुबोध कुमार, श्रम अधीक्षक मुजफ्फरपुर अजय कुमार, श्रम अधीक्षक वैशाली शशि कुमार सक्सेना, श्रम अधीक्षक सीतामढ़ी सह प्रभारी पूर्वी चंपारण रमाकांत कुमार, श्रम अधीक्षक शिवहर सह प्रभारी पश्चिम चंपारण विजय कुमार ठाकुर, जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उदय शंकर शर्मा, एनजीओ के कानूनी सलाहकार अमोद कुमार व अनिल कुमार तथा रेल पुलिस थानाध्यक्ष रंजीत कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) और पश्चिम चंपारण (बेतिया) जिलों के सभी प्रखंडों में कार्यरत श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के संयोजक उप श्रम आयुक्त नीरज नयन ने प्रतिभागियों को जानकारी दी कि बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजना-2025 लागू की गई है, जिसमें 18 विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। उन्होंने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 एवं संशोधित 2016 के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।


उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान स्कूल और खेल के मैदान में है, न कि होटल, ढाबा, मोटर गैरेज या फैक्ट्री में। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है और यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हर बच्चे को शिक्षा मिले और उनका बचपन सुरक्षित रहे।
तकनीकी सत्र में विभिन्न श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने बाल श्रमिकों की विमुक्ति, पुनर्वास तथा आर्थिक और गैर-आर्थिक सहायता से संबंधित प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है। ऐसा करने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा अथवा दोनों का प्रावधान है।
जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत समिति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समिति जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास और सुरक्षा के लिए कार्य करती है तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें बाल देखभाल संस्थानों, पालक देखभाल या गोद लेने की प्रक्रिया से जोड़ा जाता है।
कार्यक्रम के दौरान उप श्रम आयुक्त ने सभी उपस्थित हितधारकों को किसी भी परिस्थिति में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बाल मजदूरी न कराने की शपथ भी दिलाई। श्रम अधीक्षक मुजफ्फरपुर ने बताया कि राज्य कार्य योजना के तहत सघन अभियान चलाकर बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जा रहा है। विमुक्त बच्चों को एक माह का राशन, वस्त्र के लिए तीन हजार रुपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये की सहायता दी जाती है।
कार्यक्रम का संचालन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मुरौल डॉ. रश्मि राज ने किया। अंत में श्रम अधीक्षक मुजफ्फरपुर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।