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मुजफ्फरपुर: बन्दरा अंचल के हल्कों में, जमाबंदी का रसीद तो कटा है, लेकिन उनका जमाबंदी कायम नहीं!

-जमाबंदी का रसीद तो कटा है, लेकिन उनका जमाबंदी कायम नहीं

-बन्दरा अंचल क्षेत्र के विभिन्न इलाकों का मामला
-छानबीन में आ रहे ऐसे मामले

मुुुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक।

बन्दरा अंचल क्षेत्र के विभिन्न गांव में कई ऐसे भूस्वामी हैं,जिनके जमीन के जमाबंदी का रसीद तो कटा है, लेकिन उनका जमाबंदी कायम नहीं है। ऐसे लोगों की संख्या तकरीबन 1000 से ज्यादा है। इस तरह का मामला प्रखंड के हत्था एवं मुन्नी/बैंगरी तथा मतलूपुर पंचायत क्षेत्र में ज्यादा है,वहीं प्रखण्ड के अन्य पंचायत क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं है। परेशान लोगों के अंचल कार्यालय पहुंचने और उनकी बात को गम्भीरता से समझने के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है। बन्दरा के सीओ अंकुर राय ने बुधवार को बताया कि जब लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना एवं समझा गया,संदर्भित कागज कागजातों की छानबीन की गई तो इस तरीके के मामले सामने आने लगे। पहले एक-दो मामले समझ में आया, फिर जब खोजबीन की गई एवं स्थानीय राजस्व कर्मचारियों से बातचीत की गई तो ऐसे मामले सैकड़ो नहीं बल्कि हजार में निकल रहे।

सीओ ने बताया कि हत्था, मतलूपुर और मुन्नी पंचायत क्षेत्र में इस तरह के ज्यादा मामले हैं। वहां के राजस्व कर्मचारियों को ऐसे मामलों को चिन्हित कर आवश्यक दिशा में कार्रवाई करने तथा ऐसे भूस्वामियों को चिन्हित कर छानबीन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कागजातों की छानबीन में यह बात भी सामने आ रहा है कि इनमें कई रसीद फेंक भी हो सकते है। ऐसी आशंका है कि इनमें कई लोगों ने फेक रसीद भी कटवा रखा है, हालांकि इसकी सत्यता अभी जांची जा रही है।

यह पड़ रहा प्रभाव:

सीओ ने बताया कि इसके वजह से जमीनों की खरीद-बिक्री भी प्रभावित हो रही है । पहले हस्तलिखित रसीद कटते थे। लिहाजा कई लोगों के जमीनों के रसीद तो कटे हैं, लेकिन उन रसीदों का जमीनों के रजिस्टर से मिलान करने पर खाता,खेसरा,रकवा के नम्बरों में मिसमैच दिखता है। कुछ रसीद में खाता एवं खेसरा नहीं है,जबकि रकवा चढ़ा दिखता है। बहरहाल ऐसे मामलों को लेकर ज्यादातर लोग परेशान हैं।