-भारत की पहचान संतों ऋषियों, मुनियों से है:साध्वी
दीपक कुमार तिवारी।बन्दरा/मुजफ्फरपुर।
ब्लॉक चौक पर श्री हरि कथा के अंतिम दिन मंगलवार को कथा व्यास साध्वी विदुषी शीतली भारती ने कहा कि भारत सनातन धर्म के परंपरा का अनुपालन करता है,इसलिए भारत की पहचान संतों ऋषियों, मुनियों से है । भारत की सांस्कृतिक विरासत का असली संरक्षक संत ही है। भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर ने अपना बलिदान दे दिया,वहीं उनके ही पुत्र गौरवशाली परंपरा का निर्बहन करते हुए सच्चे पातशाह गुरु गोबिंद सिंह ने अपने जिगर के टुकड़े को दीवार में चुनते हुए मां भारती के लिए शहीद कर दिया ।उन्होंने कहा कि कबीर हो या रैदास, मीरा हो या नरसी मेहता, सुपथ भगत हो या आदि गुरु शंकराचार्य, सभी ने भारतीय संस्कृति की रक्षा करते हुए जन मानस को गौरवान्वित जीवन जीने की प्रेरणा दी । जब जब संतों के सानिध्य में देश रहा आगे बढ़ा है । भारत विश्व गुरु बना ।

वहीं कथा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी कुन्दनानन्द ने कहा कि जो भगवान कृष्ण,भगवान राम और सभी संतों ने कहा जो कहा है, वही सनातन और पुरातन धर्म है। सभी का एक ही मत है कि ईश्वर दर्शन का विषय है ।

संत वही है जो हमारे घट के भीतर स्थित परमात्मा का दर्शन करा दे । कल्याण सिर्फ सद्गुरु के शरण में जाने से ही होगा । जब जीवन में सद्गुरु आते है तो उस अनन्त भगवान का दर्शन करा देते है । हमारा जीवन ईश्वर दर्शन के लिए ही है |गुरु सर्व पूजनीय हैं।भगवान शिव ने तो यहां तक कहा की कोई ब्रह्म की पूजा करे या विष्णु की या शिव की अगर उसने गुरु की पूजा नहीं की तो सभी के पूजा का कोई फल नहीं है। पृथ्वी पर गुरु शिव का ही साकार स्वरूप है ।
कार्यक्रम के पश्चात विदाई समारोह हुआ। इस दौरान श्रोताओं की आंखें नम हो गयी।












