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बीएमडी महाविद्यालय में ‘कबीर की साहित्य साधना’ पर व्याख्यान, गुरु के महत्व पर डाला गया प्रकाश

-बीएमडी महाविद्यालय में ‘कबीर की साहित्य साधना’ पर व्याख्यान, गुरु के महत्व पर डाला गया प्रकाश

राजापाकर (वैशाली) | संजय श्रीवास्तव
बीएमडी महाविद्यालय, दयालपुर के हिंदी विभाग की ओर से ‘कबीर की साहित्य साधना’ विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तारकेश्वर पंडित ने की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. पंडित ने कहा कि संसार नश्वर है और जो इस दुनिया में आया है, उसे एक दिन जाना ही है। उन्होंने कबीर के विचारों को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आचार्य एवं पूर्व विभागाध्यक्ष (हिंदी), आचार्य नरेंद्र देव महाविद्यालय, शाहपुर पटोरी तथा पूर्व निदेशक, वयस्क शिक्षा, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के डॉ. बिंदेश्वर दास ने कबीर के पदों के माध्यम से गुरु के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कबीर के साहित्य की जितनी आलोचना हुई, उतनी शायद ही किसी अन्य साहित्यकार की हुई हो। कबीर ने अपने नाम से कोई ग्रंथ तैयार नहीं किया, बल्कि बाद में उनके अनुयायियों ने कबीर पंथ की स्थापना की।


डॉ. दास ने कहा कि कबीर केवल साहित्य साधना नहीं, बल्कि समाज साधना के पक्षधर थे। उनका मानना था कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अहंकार और पूर्वाग्रह से मुक्त होकर गुरु के पास जाना चाहिए, तभी वह सच्चे ज्ञान को ग्रहण कर सकता है।
इस अवसर पर डॉ. महर्षि अखिलेश ने भी अपने विचार रखते हुए कबीर के जीवनवृत्त, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभाष कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूजा कुमारी ने किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को कबीर के विचारों, सामाजिक चेतना और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व से अवगत कराया गया।