-निर्णायक भूमिका में महिला मतदाता
-लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त करने के दायित्व का निर्वहन कर रही
दीपक कुमार तिवारी।पटना।
आम चुनाव के बाद सत्ता की बागडोर किसके हाथ में होगी, यह तो भविष्य ही बताएगा, परंतु इसमें किंचित संदेह नहीं कि महिलाएं एक महत्वपूर्ण मतदाता समूह के रूप में उभर आई हैं और यह सुखद आश्चर्य है कि अब वे पुरुष मतदाताओं से एक कदम आगे बढ़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त करने के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं। दुनिया भर के अध्ययन इस अवधारणा को स्थापित करते आए हैं कि ‘सामाजिक-आर्थिक समानता महिलाओं को मतदान केंद्रों तक लेकर जाती है।’ साफ है कि भारत बहुत हद तक लैंगिक असमानता की खाई को पाट चुका है, क्योंकि मतदान केद्रों तक वे महिलाएं नहीं पहुंच सकतीं, जिनमें आत्म-सशक्तीकरण का अभाव हो।

आत्म-सशक्तीकरण का प्रत्यक्ष संबंध लैंगिक समानता से है। भारतीय महिलाएं सशक्त वोट बैंक के रूप में उभरेंगी, यह आकलन आइरिश टाइम्स ने पहले आम चुनाव के समय ही कर दिया था। तीन दिसंबर, 1951 को ‘इंडियन इलेक्शन कुड बी हाउसवाइव्स च्वाइस’ शीर्षक से लिखे लेख के अनुसार ‘चुनाव में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले दल घोषणा पत्रों और उम्मीदवारों के चयन में गृहिणियों को खुश रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।’











