-बागमती के रौद्र रूप के बीच कटरा की महिलाओं की मार्मिक पुकार, पानी में खड़े होकर गंगा मैया से लगाई गुहार
कटरा। कभी जिन गांवों में शहनाई, मुंडन और उत्सवों के मौके पर मंगलगीत गूंजते थे, आज वही इलाके बागमती के मटमैले और तेज पानी की चपेट में हैं। बाढ़ ने कई घरों और परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। ऐसे संकट के बीच कटरा की ग्रामीण महिलाओं का एक मार्मिक दृश्य सामने आया है, जहां वे बाढ़ के पानी में खड़ी होकर पारंपरिक लोकगीतों के जरिए मां गंगा से आपदा से मुक्ति की प्रार्थना करती नजर आईं।
बाढ़ के पानी में खड़ी महिलाओं की आंखों में अपने घर-परिवार और गांव को लेकर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। वे रुंधे गले से पारंपरिक गीत गा रही थीं—“टीका जो सोहे, मांगो गंगा माई के… राजा विराज हैं, गंगा मैया… ओढ़न के ओढ़निया हे गंगा मैया…।”

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई गृहस्थी देखते ही देखते बाढ़ के पानी में डूब गई। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित है और लोग राहत व बचाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं। स्थानीय लोगों ने नावों की उपलब्धता और राहत सामग्री को लेकर भी परेशानी जताई है।
महिलाओं का कहना है कि जो मंगलगीत कभी घर-आंगन में खुशहाली के लिए गाए जाते थे, आज वही गीत बागमती के रौद्र रूप के बीच प्रार्थना बन गए हैं। पानी में हाथ जोड़कर वे अपने बच्चों, परिवार और गांव की सुरक्षा की कामना कर रही हैं।
कटरा के जलमग्न गांवों में बाढ़ के बीच यह दृश्य ग्रामीणों की बेबसी और पीड़ा को बयां कर रहा है। आंखों में उम्मीद लिए लोग अब पानी घटने और हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।












