-फूलों की होली को जीवन की होली बना लो : आचार्य सुदर्शन
पटना। अनूप।
बोरिंग रोड स्थित भद्रकाली मंदिर में रविवार को राम कथा के तीसरे दिन हजारों भक्तों के बीच आचार्य सुदर्शन महाराज ने होली महोत्सव के साथ कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि रामचरितमानस की कथा में जो नैतिक सुगंध है उस सुगंध से अपने जीवन को भरने की आवश्यकता है। ताकि प्रभु श्री राम की कृपा से जब केवट और लाखों बनवासी बंदर ,भालू तथा भिलनी, शबरी का जब उद्धार हो सकता है तो निश्चित रूप से हमारा भी उद्धार होगा l इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद. मौजूद रहे। आचार्य श्री ने कहा राम केवल कोई व्यक्ति नहीं राम तो एक तत्व हैं l ” राम ब्रह्म चिन्मय अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशि”। वह राम आज नर रूप में जनकपुर में दूल्हा बनकर आए हैं। बिहार से सटे जनकपुर में आदि शक्ति ने ब्रह्म श्रीराम को इस भूमि पर आमंत्रित किया। यह हमारी संस्कृति है। राम ने स्वयं केवट के द्वार तक जाकर केवट का उद्धार किया। वन प्रदेशों में जाकर संतों को अपनी भक्ति दी। साथ ही उपेक्षित शबरी की कुटिया में जाकर उन्हें श्रेष्ठ भामिनी और माता कहा।

सबसे महत्वपूर्ण रामचरितमानस की घटना है यह है कि राम ने बिखरे हुए वनवासियों को एकत्र कर उन्हें देश की रक्षा करने के लिए तैयार किया। बाहर से आने वाले समस्त आक्रमणकारियों को खदेड़ कर देश से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया और आवश्यकता पड़ने पर दूसरे के देश में युद्ध भी लड़ा। कथा के अंत में होली महोत्सव का वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा आज हमारे जीवन में जो तनाव, चिंता और दुख है वह तभी नष्ट होगा जब हम अपने जीवन के पल, पल को होली महोत्सव बना दें l उन्होंने कहा कि फूलों की होली की परंपरा हमलोगों ने पहली बार बिहार की भूमि से शुरू की है l यह परंपरा आज पूरे देश में प्रचलित है l बिहार के सीतामढ़ी में सीता माता की जन्म स्थली में जन्म लेने के कारण आज पूरी दुनिया में बिहार का गौरव ध्वज फहरा रहा है l इस कारण हमें गर्व हो रहा है।














