-नेपाल में हिंदी अधिकार केलिए लड़ने वाले योद्धा राजेश्वर नेपाली कमी हमेशा खलती रहेगी:-सच्चिदानंद मिश्र
जनकपुरधाम/मिश्रीलाल मधुकर।
नेपाल में हिंदी कोअधिकार के लिए मरते दम तक लड़ने वाले योद्धा स्व.राजेश्वर नेपाली को हम भूल नहीं सकते हैं।अपने जीवन में उन्होंने मधेश का पहिरन धोती,कमीज,गमछा को उन्होंने छोड़ा नहीं।इसी तरह हिंदी को नेपालमें मान्यता दिलाने के लिए सरकार से लड़ते रहे। हिंदी के साथ राष्ट्र भाषा नेपाली तथा मैथिली के प्रति उतना ही समर्पित थे। नेपाली तथा मैथिली में दर्जनों कविता तथा कहानी लिखे हैं। अपनी कलम से नेपाल में प्रजातंत्र स्थापना के लिए सतत प्रयास रत रहे। राजशाही के विरोध में समाचार प्रकाशित करने के लिए अनेकों वार जेल भी गये। वी.पी.कोईराला, गणेश मान सिंह, महेन्द्र नारायण निधि, भद्रकाली मिश्र,राम नारायण मिश्र जैसे नेताओं के करीबी थे।इसी तरह भारत के की नेता भी नेपाली जी करीबी थे। कादम्बिनी के संपादक राजेश्वर नेपाली से काफी प्रभावित थे।

अपने 6दशक के पत्रकारिता कैरियर में नेपाल तथा भारत के दर्जनों संघ संस्थाओं नेपाली जी को सम्मानित कर चुके हैं। जनकपुर बौद्धिक समाज द्वारा नेपाल भारत के महापुरुषों को जयंती, पुण्यतिथि मनाने का काम करते रहे। नेपाल के विभिन्न शहरों में राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन दर्जनों वार अर्थ के अभाव में वे सफलता पूर्वक आयोजित करवाए। नेपाल के ख्यातिप्राप्त साहित्यकार को राजर्षि जनक पुरस्कार 51हजार की राशि राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में देने का काम किए।वे एकवारी राजनीति में भाग्य आजमाए लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।











