*चीन पेड़ों में हमसे तीन गुणा आगे, भारत में प्रति व्यक्ति केवल 28 पेड़ बचे
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*प्रकृति संरक्षण पखवाड़ा 21 जुलाई – 4 अगस्त: डब्ल्यूएनडी
संवाददाता। दरभंगा।
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वैश्विक लोकतंत्र की संस्था वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (डब्ल्यूएनडी) के तत्त्वावधान में विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (28 जुलाई) के अवसर पर 21 जुलाई 2024 – 4 अगस्त 2024 तक प्रकृति संरक्षण पखवाड़ा का आयोजन किया गया। पखवाड़े की शुरुआत दरभंगा के लहेरियासराय में पण्डासराय स्थित राम जानकी मन्दिर के सरोवर तट से हुई। लेखक एवं पृथ्वी अधिकार कार्यकर्ता डॉ. जावैद अब्दुल्लाह ने लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिये छः संकल्प दिलाये, जिस पर वहाँ उपस्थित सभी लोगों ने स्वेच्छा से प्रकृति संरक्षण की प्रतिज्ञा ली और डॉ. अब्दुल्लाह के साथ शब्दशः दोहराया: मैं प्रकृति का सदस्य, पृथ्वीवासी- सत्य का अनुगामी एक नैतिक मानव प्राणी के रूप में संकल्प लेता हूँ कि अपनी पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करूँगा और इसे संरक्षित करूँगा। इस सभा की अध्यक्षता करते हुये पर्यावरणविद और एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. विद्यानाथ झा ने कहा कि मन्दिर के प्रकृतिमय प्रांगन में लगे चीर के पेड़ को देखकर मुझे बेहद ख़ुशी हुई। यह हिमालय क्षेत्र में पाया जाने वाला पेड़ है। पिनस रोक्सबर्गी नामक इस पेड़ की पत्त्तियाँ बहुत ज्वलनशील होती हैं जिससे कई बार जंगल में आग लग जाती है। आगे अपने वक्तव्य में मानव समाज की मनोदशा पर चिन्ता जताते हुये प्रो. विद्यानाथ झा ने कहा कि देखिये सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि आज मनुष्य समझता है कि इस पृथ्वी पर केवल हम ही रहेंगे, दूसरा कोई जीव नहीं रहेगा।

ऐसा कभी सम्भव नहीं है। पृथ्वी के ज्ञात इतिहास में लाखों-करोड़ो-अरबों वर्ष की जो इसकी कहानी है, उसमें मनुष्य इसका नियंता नहीं था। बहुत सारे जीव-जन्तु और वृक्ष-वनस्पति के साथ-साथ उसमें एक प्राणी मनुष्य भी था। लेकिन आज मनुष्य नियंता बन गया है। हर चीज़ को अपने हिसाब से कंट्रोल करना चाहता है जो कि प्रकृति के विरुद्ध है। मानव प्रकृति का एक अंग है और अंग बनके ही रहे, इसी में सबका जीवन है। राम जानकी मन्दिर के प्रतिनिधि मनीष जायसवाल ने डॉ. जावैद अब्दुल्लाह को धन्यवाद देते हुये कहा कि प्रकृति के कार्य के लिये आगे भी आपको मेरा पूर्ण सहयोग रहेगा। मनीष जायसवाल ने आगे कहा कि मेरा अनुभव यह है कि पौधा तो हम सभी लगाते हैं लेकिन अगले छह माह या साल भर तक क्या उसका संरक्षण करते हैं, इस पर हमें ध्यान देने की ज़रुरत है। पखवाड़ा के इस पहले चरण का संचालन करते हुये डॉ. अमरजी कुमार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में चीन से तीन गुणा प्रति व्यक्ति कम पेड़ बचे हैं। कुछ देशों का आँकड़ा रखते हुये डॉ. अमरजी कुमार ने कहा कि कनाडा प्रति व्यक्ति 8953 पेड़। रूस प्रति व्यक्ति 4461 पेड़। अमेरिका प्रति व्यक्ति 716 पेड़। चीन में प्रति व्यक्ति 102 पेड़ और भारत में प्रति व्यक्ति केवल 28 पेड़। सोचनीय तथ्य है कि जिस देश में प्रकृति की पूजा होती है वहाँ आज लगभग प्रति व्यक्ति केवल 28 पेड़ रह गये हैं। आगे डॉ. अमरजी ने कहा कि जनसँख्या में हम चीन से आगे बढ़ गये लेकिन पेड़ों की संख्या में चीन से तीन गुणा अधिक पीछे हैं। इसलिये डब्ल्यूएनडी जैसे आन्दोलनों की आज भारत को बहुत ज़रुरत है। इस अवसर पर, सामाजिक कार्यकर्ताओं में महेश प्रसाद, सन्तोष, सुजीत एवं दिलीप मण्डल, विकास कुमार, धर्मेन्द्र चौधरी, नन्दकिशोर, गणेश झा व आनन्द झा उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन सभी लोगों ने प्रो. विद्यानाथ झा के हाथों से सेब का पौधा लगाकर किया।












