-एमआईटी मुजफ्फरपुर के छात्रों के एआई आधारित नवाचारों को बड़ी सफलता, ₹6 लाख की वित्तीय सहायता के लिए चयन
मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), मुजफ्फरपुर के विद्यार्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र रौनित और सिविल इंजीनियरिंग विभाग की चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा जिशु कुमारी सिन्हा कृषि एवं ऊर्जा संरक्षण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए दो अभिनव परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। इन परियोजनाओं को IIT पटना के प्री-इन्क्यूबेशन कार्यक्रम और PM-RKVY के तहत कुल ₹6 लाख की वित्तीय सहायता के लिए चयनित किया गया है।
पहली परियोजना “कृषि दृष्टि (Krishi Drishti)” है, जिसका विषय AI-Powered Intelligent Crop Protection, Real-Time Monitoring and Decision Support System for Precision Agriculture है। परियोजना का उद्देश्य AI और सेंसर आधारित तकनीक के माध्यम से स्मार्ट एवं आधुनिक कृषि व्यवस्था विकसित करना है।
परियोजना के तहत जंगली जानवरों और पक्षियों की पहचान, खेत में आग लगने पर रियल-टाइम अलर्ट, स्मार्ट सिंचाई, मिट्टी एवं वर्षा के आंकड़ों के आधार पर उपयुक्त फसल की अनुशंसा और फसल कटाई के उचित समय का पूर्वानुमान जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। किसानों के लिए एकीकृत डैशबोर्ड और मोबाइल एप के माध्यम से खेत की निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इस परियोजना में रौनित और जिशु कुमारी सिन्हा टीम सदस्य हैं। इसका मार्गदर्शन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अंकित कुमार सिंह और प्रो. फैज अहमद कर रहे हैं।
वहीं, टीम की दूसरी परियोजना “AI Powered Energy Optimization Innovation” है। इसका उद्देश्य शिक्षण संस्थानों, कार्यालयों और अन्य भवनों में होने वाली अनावश्यक बिजली खपत को AI की मदद से कम करना है। प्रणाली में AI आधारित कैमरा तकनीक के माध्यम से कमरे या कक्षा को अलग-अलग जोन में विभाजित कर व्यक्ति की मौजूदगी की पहचान की जाती है। जिस क्षेत्र में व्यक्ति मौजूद होगा, उसी हिस्से की लाइट और पंखे आवश्यकता के अनुसार संचालित किए जाएंगे। सेंसर की मदद से प्रकाश की तीव्रता और पंखे की गति को भी परिस्थितियों के अनुरूप नियंत्रित करने की व्यवस्था होगी।

परियोजना के पायलट परीक्षण में 25 से 35 प्रतिशत तक ऊर्जा बचत के परिणाम सामने आए हैं। एमआईटी मुजफ्फरपुर में कक्षा के समय इसका परीक्षण कर जोन-वार ऊर्जा उपयोग का मूल्यांकन भी किया गया। इस परियोजना में रौनित और जिशु कुमारी सिन्हा टीम सदस्य हैं, जबकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. आलोक रंजन इसके मेंटर हैं।
नवाचार को बड़ी सफलता तब मिली, जब IIT पटना के Incubation Centre ने इसे 12 महीने के Pre-Incubation Programme के लिए चयनित किया। उपलब्ध प्री-इन्क्यूबेशन ऑफर लेटर के अनुसार “AI Powered Energy Optimisation Innovation” प्रस्ताव के लिए ₹2 लाख के Prototype Grant का प्रावधान किया गया है। इसके साथ टीम को हैंडहोल्डिंग, मेंटरशिप, POC/प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, फंड रेजिंग तथा प्रोटोटाइप एवं संचालन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट भी मिलेगा।
इसके अतिरिक्त टीम को PM-RKVY Programme के SOP-III के तहत प्रस्तावित कंपनी के लिए ₹4 लाख के Grant-in-Aid के लिए भी चयनित किया गया है। चयन संबंधी सूचना में स्टार्टअप को कॉलेज एवं विभागाध्यक्ष से तकनीकी मार्गदर्शन के साथ डॉ. दीपक पटेल, CO-PI, SABAGRIs, BAU Sabour से मार्गदर्शन लेने का उल्लेख है।
इस तरह दोनों योजनाओं के तहत टीम को कुल ₹6 लाख की वित्तीय सहायता के लिए चयनित किया गया है। यह उपलब्धि विद्यार्थियों के नवाचार को प्रोटोटाइप से आगे व्यावहारिक उपयोग और उद्यमिता के स्तर तक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एमआईटी मुजफ्फरपुर के प्राचार्य डॉ. एम. के. झा ने इस उपलब्धि पर रौनित, जिशु कुमारी सिन्हा और दोनों परियोजनाओं के मेंटर्स को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की परियोजनाएं तकनीकी शिक्षा को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान से जोड़ने के साथ विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने टीम को परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन और भविष्य की उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दीं।
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