-आरा में बीजेपी के अंदर घमासान,हार के बाद भीतरघात के आरोप
-महागठबंधन को हुआ फायदा
पटनाआरा। दीपक कुमार तिवारी।
लोकसभा चुनाव 2024 में भोजपुर की प्रतिष्ठित आरा सीट पर हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर घमासान मचा हुआ है। पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने पार्टी के ही कुछ नेताओं पर भीतरघात करने और चुनाव हराने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के कुछ नेताओं ने पैसों का खेल खेला, पोलिंग एजेंट्स को बूथों तक नहीं पहुंचने दिया और भोजपुरी स्टार पवन सिंह को खड़ा कराकर वोटों का बंटवारा कराया।
इस हार का असर इतना व्यापक रहा कि एनडीए को भोजपुर और आसपास की पांच लोकसभा सीटों—आरा, बक्सर, सासाराम, काराकाट और औरंगाबाद—पर हार का सामना करना पड़ा। आरके सिंह ने खुलकर कहा कि उनकी ही पार्टी के कुछ लोगों ने साजिश रची और उन्हें हरवा दिया।
आरके सिंह के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया:
आरके सिंह के आरोपों पर बीजेपी के ही वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बड़हरा के विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने आरके सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके पास सबूत हैं तो सामने लाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर चुनाव लड़ने का इतना ही शौक है तो मुखिया, सरपंच या मेयर का चुनाव लड़ लीजिए।”
वहीं, आरा के बीजेपी विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पार्टी के अंदर की बातें सार्वजनिक मंच पर नहीं कही जानी चाहिए। उन्होंने आरके सिंह को सलाह दी कि वे पार्टी के मंच पर अपनी बात रखें और नेतृत्व के फैसले की प्रतीक्षा करें।
पवन सिंह को मोहरा बनाने का आरोप:
आरके सिंह ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह को चुनाव में खड़ा करने को लेकर भी बीजेपी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पवन सिंह को अपने दम पर नहीं बल्कि बीजेपी के कुछ नेताओं ने साजिशन उतारा, ताकि वोटों का बंटवारा हो और महागठबंधन को फायदा पहुंचे। आरके सिंह ने कहा कि पहले पवन सिंह को आसनसोल से टिकट देने की बात हुई, लेकिन जब विरोध हुआ तो उन्हें टिकट नहीं दिया गया। इससे नाराज होकर पवन सिंह निर्दलीय मैदान में कूद पड़े।
2024 की हार और आंकड़ों का खेल:
आरा लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं। 2019 में आरके सिंह ने इनमें से छह पर बढ़त बनाई थी, लेकिन 2024 में समीकरण पूरी तरह बदल गए। इस बार वे सिर्फ आरा विधानसभा में मामूली बढ़त बना पाए, बाकी सभी छह सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार सीपीआई (एमएल) के सुदामा प्रसाद से पिछड़ गए।
2024 के चुनाव में आरा सीट पर कुल 20.55 लाख वोटर थे, जिनमें से 10.96 लाख ने मतदान किया।

महागठबंधन (CPIML) के सुदामा प्रसाद को 5,29,382 वोट मिले।
बीजेपी के आरके सिंह को 4,69,574 वोट मिले।
महागठबंधन ने 59,808 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
2019 में यही आरके सिंह 1.47 लाख वोटों से जीते थे, जबकि 2014 में उन्होंने 1.35 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 में उनकी जीत की हैट्रिक टूट गई। अब उन्होंने इस हार के लिए पार्टी के कुछ नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
आगे की राजनीति और विधानसभा चुनाव 2025 पर नजर:
आरके सिंह ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर 2025 के विधानसभा चुनाव में उनके खिलाफ साजिश रचने वाले किसी नेता को टिकट दिया गया, तो वे खुद उसके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे। उन्होंने कहा, “हम किसी को छोड़ने वाले नहीं हैं। जैसे ही सबूत मिलेंगे, हम नाम उजागर करेंगे।”
उधर, बड़हरा से छह बार विधायक रह चुके राघवेंद्र प्रताप सिंह 2025 में सातवीं बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में आरा और बड़हरा की राजनीति में आने वाले दिनों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल सकती है।
आरा लोकसभा सीट पर बीजेपी की हार के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। आरके सिंह के भीतरघात के आरोपों के बाद पार्टी में उथल-पुथल मची हुई है। बड़हरा और आरा के विधायक उनके आरोपों को नकार रहे हैं, जबकि आरके सिंह अपनी हार के लिए पार्टी के अंदर के कुछ लोगों को दोषी ठहरा रहे हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह कलह बीजेपी के लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकती है, जिसका सीधा फायदा महागठबंधन को मिल सकता है।
#आरा_राजनीति #बीजेपी_कलह #आरके_सिंह #पवन_सिंह #लोकसभा_2024 #महागठबंधन_की_जीत











