-आठों पहर गुलजार रहने वाला रसुवा बाजार बाढ़ के मलबे में तब्दील
काठमांडू। दीपक कुमार तिवारी/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को भोटेकोसी नदी में आई भीषण बाढ़ ने वर्षों से पर्यटकों और कारोबारियों से गुलजार रहने वाले रसुवा बाजार की तस्वीर बदल दी। कभी दिन-रात चहल-पहल से भरा रहने वाला बाजार अब मलबे में तब्दील हो गया है। कई घर सुनसान पड़े हैं और बिजली, पानी तथा दूरसंचार सेवाएं ठप होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
काठमांडू से करीब 120 किलोमीटर दूर और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा से सटा रसुवा जिला हिमाली क्षेत्र में स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतीय क्षेत्र और धार्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध रसुवा में भारत समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक पहुंचते रहे हैं। नेपाल-तिब्बत के पुराने व्यापारिक मार्ग के कारण भी इस क्षेत्र का ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व रहा है। वर्तमान में चीन के साथ नेपाल का व्यापार भी इसी मार्ग से होता है।
रसुवागढ़ी इस क्षेत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण निशानी है। वहीं प्रसिद्ध गोसाईं कुंड हिंदुओं का पवित्र तीर्थस्थल है। इसके अलावा पार्वती कुंड, दूध कुंड, उत्तरगया और जलेश्वरनाथ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। झांगे झरने की कलकल ध्वनि और यहां के पर्वतीय प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं।
रसुवा के तातोपानी क्षेत्र में चीन का खासा बाजार भी है, जहां नेपाली व्यापारी चीनी सामान खरीदते हैं। शिलाजीत, पश्मीना ऊन की चादरें और नेपाली हस्तशिल्प यहां आने वाले भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। नेवार, शेर्पा और तामांग समुदायों के गांव भी अपनी संस्कृति और जीवनशैली के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

काठमांडू से सड़क मार्ग से करीब पांच घंटे में रसुवा पहुंचा जा सकता है। मानसरोवर यात्रा के लिए भी यह महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यही वजह रही कि रसुवा बाजार को लेकर स्थानीय स्तर पर कहा जाता था कि यह बाजार कभी नहीं सोता। दिन हो या रात, पर्यटकों और व्यापारियों की आवाजाही के कारण बाजार में रौनक बनी रहती थी।
नेपाल में माओवादी संघर्ष के दौर में भी चीन सीमा के निकट होने और व्यापारिक गतिविधियों के कारण इस बाजार की रौनक पूरी तरह प्रभावित नहीं हुई थी। चीन से आवश्यक सामानों की आपूर्ति और पर्यटकों की आवाजाही ने बाजार की अर्थव्यवस्था को लगातार सहारा दिया।
लेकिन बुधवार की भोटेकोसी बाढ़ ने इस पूरे परिदृश्य को बदल दिया। तेज बहाव के साथ आए पानी और मलबे ने बाजार को भारी नुकसान पहुंचाया। कई स्थानों पर घर और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। बिजली, पेयजल और संचार व्यवस्था बाधित होने से स्थानीय लोगों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के बचाव और राहत कार्य में नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। प्रभावित लोगों तक भोजन के पैकेट और पानी की बोतलें पहुंचाई जा रही हैं। राहत सामग्री के सहारे लोग किसी तरह अपना जीवन बचाने में जुटे हैं।
कभी पर्यटकों की चहल-पहल, व्यापारिक गतिविधियों और पहाड़ी संस्कृति से गुलजार रहने वाला रसुवा बाजार अब तबाही की तस्वीर पेश कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार को पुराने स्वरूप में लौटने में लंबा समय लगेगा। बाढ़ ने सिर्फ मकानों और दुकानों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि रसुवा की वर्षों से बनी पर्यटन और व्यापार की पहचान को भी गहरा आघात पहुंचाया है।












