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स्पॉट : बन्दरा अंचल में ‘अधिकारी’ के हटते हीं चलती है ‘मनमर्जी’…फरियादियों को ‘टरकाते-पटाते’ हैं कर्मी!

-बन्दरा अंचल में ‘अधिकारी’ के हटते हीं चलती है ‘मनमर्जी’

-फरियादियों को टरकाते हैं कर्मी
-पेड़ के छांव में चलता है ‘सेटिंग’ या ‘चुनावी-बतकही’ का दौड़
-यहां प्रखण्ड परिसर के कार्यालय कर्मी और इलाके से प्रखण्ड पहुंचे लोगों की दिखती है मौजूदगी

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।

समय : दोपहर। स्थान : अंचल कार्यालय बन्दरा।
ताला खुले हैं पर कार्यालय के मुख्य दरवाजा सटे हुए हैं। अंदर कार्यालय में कोई कर्मी नजर नहीं आ रहा है, ना बाहर कोई फरियादी। न गार्ड दिख रहे न अधिकारी। ‘A2Zन्यूज़Live’ की टीम पहुंची। कैमरे की फ्लैश चमकी। प्रखंड परिषर के पेड़ के नीचे की चाय दुकान से बिस्कुट खाते हुए एक कर्मी कक्ष के अंदर दाखिल हुए। इसी बीच दूसरे कर्मी को खोजने पर पता चला कि वह सो रहे हैं। साथी की सूचना पर वह भी कार्यालय पहुंचे। कुछ देर बाद तीसरे-चौथे कर्मी भी परिसर में पेड़ के नीचे स्थित चाय- बिस्कुट की दुकान से पहुंचे। कुछ देर में नूनफ़ारा से एक फरियादी सुशील सहनी दाखिल खारिज से जुड़े हुए कागजातों को लेकर पहुंचे।

उन्होंने बताया कि विपक्षी राजो देवी एवं ललिता देवी के नाम से दाखिल खारिज उनके द्वारा आपत्ति करने के बावजूद भी कर दिया गया। इस मामले को लेकर वे दौड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह जनवरी महीने से लगातार अंचल कार्यालय दौड़ रहे हैं। 1 फरवरी को उन्होंने दाखिल खारिज के विरोध में आपत्ति पत्र जमा किया था, बावजूद विपक्षी पार्टी का 16 अप्रैल की तिथि में दाखिल खारिज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अंचल से हल्का तक खुलेआम बिचौलिया हावी है। मनमानी इतनी है कि किसी भी मामलों में सही गलत और आपत्ति मायने नहीं रखता। मन माफिक दाम जैसे ही मिलता है कि हल्का में बैठने वाले राजस्व कर्मचारी एवं उनके अटर्नी मुश्किल काम को भी आसान कर देते हैं।यह स्थिति करीबन सभी क्षेत्रों में है। इसी तरीके से पटसारा के ओमप्रकाश ने बताया कि उनके पूर्वज के द्वारा एक अंतरजातीय व्यक्ति को 3 डिसमिल जमीन लिखी गई थी, जबकि वह अपने प्रभाव में अतिरिक्त जमीनों पर कब्जा जमा रखा है। इसके विरोध में दावा-आपत्ति के मामले को लेकर वे अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।

इससे पहले मामले की शिकायत उन्होंने हत्था थाना में की है। उन्हें अब तक अंचल में अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी है,जबकि कार्यालय में मौजूद कर्मियों द्वारा संतोषजनक जबाब नहीं मिल रहा है।कर्मियों ने बताया कि मंगलवार के दिन लोक शिकायत के मामले को सीओ जिला कार्यालय रहते हैं।

दाखिल-खारिज के मामले ज्यादा हैं पेंडिंग:

वहीं अंचल सूत्रों के अनुसार दाखिल खारिज से जुड़े हुए बन्दरा अंचल में तकरीबन 2000 मामले पेंडिंग है। चालू सत्र में तकरीबन 17000 से अधिक आवेदन दाखिल खारिज को लेकर मिले थे। जिसमें तकरीबन 15000 से ज्यादा मामलों का डिस्पोजल हो चुके हैं। अधिकारियों के बदलते प्रभार एवं डोंगल आदि के कारणों से दिसंबर के बाद से प्रायः मामले लंबित होते रहे। जिसके कारण से अंचल क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। वही परिमार्जन के मामलों पर लेकर करीब 6000 आवेदन मिले थे। जिनमें 36 मामले पेंडिंग है।

अधिकारी बोले:

इस संबंध में बन्दरा सीओ अंकुर राय ने कॉल पर बताया कि प्रभार लेने के पहले के समयों के ज्यादातर मामले हैं। उन्होंने आने के बाद पिछले डेढ़ महीने में तकरीबन 650 मामले दाखिल खारिज के निपटाए हैं। उनके प्रभार लेने के समय तकरीबन 2700 मामले दाखिल खारिज के पेंडिंग थे। जिसमें अब करीब 1700 मामले पेंडिंग हैं। इसमें तकरीबन ढाई से 300 मामले कल तक निपटा दिए जाएंगे।उन्होंने बताया कि चुनावी प्रक्रिया से सभी फ्री हुए हैं। हर हाल में सभी पेंडिंग मामलों को अपडेट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।वहीं नूनफारा के फरियादी मामले में बताया कि यह डीसीएलआर स्तर का मामला है।मामले में फरियादी के पास संदर्भित कागजात की कमी है।