-श्रीहरि विष्णु के दश अवतारों में छठवें आवेशावतार हैं भगवान परशुराम : सुशील पांडेय
– प्रदोष संध्याकाल में तृतीया तिथि मिलने के कारण 19 को मनेगी जयंती
मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
भगवान श्रीपरशुराम जयंती प्रदोष संध्याकाल में तृतीया तिथि मिलने के कारण 19 अप्रैल रविवार को ही मनायी जाएगी।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीहरि विष्णु के दशावतारों में भगवान परशुराम छठवें आवेशावतार माने गए हैं। इन्होंने जमदग्नि ऋषि एवं माता रेणुका के यहाँ पुत्र रूप में अवतार ग्रहण किया था। इनका आविर्भाव त्रेतायुग में वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया को हुआ था।
यह जानकारी महर्षिनगर नगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने दी।

उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम उत्पन्न होते ही भगवान शंकर की उपासना के लिए कैलाश की ओर प्रस्थान किया। भगवान शंकर की इनपर असीम कृपा थी। इनका वास्तविक नाम राम था। उन्होंने शंकर जी से एक अमोघ अस्त्र प्राप्त किया था जो परशु (फरसा) नाम से विख्यात है। इस परशु को वे सदा धारण किए रहते थे,अतः परशु धारण करने से वे भगवान परशुराम के नाम से विख्यात हुए। इनके द्वारा निर्मित एक कल्पसूत्र है,जो परशुराम कल्पसूत्र के नाम से प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि परशुराम जन्मोत्सव के दिन भगवान परशुराम की उपासना करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है तथा मनुष्य दीर्घायु होता है।












