–भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व की जांच टीम ने किया दावा, कार्यकर्ताओं को मारने का पहले से था प्लान, सीएम को दी न्यायिक जांच के घोषणा की चेतावनी
संवाददाता।पटना।
बिहार की सियासत इन दिनों गरमाई हुई है। भाजपा के 13 जुलाई को पटना में हुए विधानसभा घेराव का प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज मामले की जांच करने के लिए शनिवार को बीजेपी की जांच दल पटना पहुंची। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच दल का एक दिन पहले ही गठन किया था। इसमें दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी, झारखंड के पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम और हरियाणा के सिरसा की सांसद सुनीता दुग्गल शामिल हैं। जांच दल ने पटना में डाक बंगला बंगला चौराहे पर जाकर उस जगह को देखा जहाँ लाठीचार्च की घटना हुई थी। वहीं जांच करने के बाद टीम ने बीजेपी प्रदेष कार्यलय में प्रेंस कॉन्प्रेंस कर मामले की जानकारी दी है।
टीम के संयोजक रघुवर दास ने जांच की बिहार सराकर ने कार्यकर्ताओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिंसा करने का प्लान पहले से ही बना रखा था। राज्य सरकार ने रैली को कुचलने का काम किया है। भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्व में उस मामले को गंभीरता से लिया है। जांच के लिए आई टीम ने मौके पर जाकर लोगों से बातचीत की है। उन्होंने बताया कि, हमारे एक हजार कार्यकर्ताओं को चोट लगी। इनमें से 300 को गंभीर चोटें आई है। जांच टीम को जितनी जानकारी मिली, उसके आधार पर हम कह सकते हैं कि ये राज्य प्रायोजित हिंसा है। सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने क्रूरता पूर्वक लाठी चार्ज करवाया। हम मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हैं। बीजेपी के नेता जनहित के मुद्दे पर शांति मार्च निकाल रहे थे। सरकार ने सोची-समझी साजिश के तहत मारपीट की। ये बहुत गलत है। सरकार का व्यवहार बहुत खराब है।आंसू गैस में मिर्चा पाउडर देकर छिड़का गया।

रघुवर दास ने कहा कि पुलिस ने बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ एक अपराधी जैसा व्यवहार किया। सभी घायलों को कमर के ऊपर चोट आई है। सरकार इस मामले की न्यायिक जांच करे। हमारे एक कार्यकर्ता की शहादत हुई है। बंगाल और केरल में हमारे कार्यकर्ता नहीं डरते तो बिहार में कैसे डरेंगे। उन्होंने कहा कि, इस घटना ने 1975 के जेपी आंदोलन को याद दिला रहा है। हमारे कार्यकर्ता आगे भी जनहित के मुद्दों पर सवाल खड़ा करते रहेंगे। हमारा यह जंग वर्तमान सरकार को सत्ता से हटाने तक जारी रहेगा। वहीं मनोज तिवारी ने कहा कि इस घटना को देखकर ऐसा लगता है कि जेपी आंदोलन के समय जो इमरजेंसी लगी थी वैसा ही नजारा है। अगर हम ठीक से देखते है तो यह स्पष्ट होता है कि सरकार की प्री प्लांड तैयारी थी। बीजेपी नेताओं को मरना है। हत्या करनी है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक आंदोलन को डील करने का अपना तरीका है। पुलिस मैनुअल अलग है। मैनुअल के मुताबिक लाठी चार्ज में कमर से नीचे करना होता है, लेकिन यहां सिर पर मारा गया। बैरिकेडिंग तोड़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यहां पहले लाठीचार्ज किया गया, उसके बाद पानी छोड़ा गया। यह सब प्री प्लांड था। मनोज तिवारी ने कहा कि रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपी जाएगी।
बता दें कि, दिल्ली से आई जांच टीम में शामिल बीजेपी सांसद विष्णु दयाल राम शामिल थे जोकि पटना के एसएसपी भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन रोकने के लिए कम से कम बल का प्रयोग करना होता है। जब हमने अपने कार्यकर्ता से बात की तो कहीं से नहीं लगता है कि कम से कम बल का प्रयोग किया गया। यहां तो एक व्यक्ति के पीछे 20-20 पुलिस लगाई गई थी। पुलिस द्वारा राजनीतिक दल के प्रदर्शनकारियों पर अपराधियों को रोकने जैसे प्रहार किया गया है। टीम में शामिल सुनीता दुग्गल ने कहा कि शांति पूर्वक मार्च था। नीतीश सरकार ने महिलाओं पर लाठियां बरसाईं है। बहुत-सी महिलाएं घायल हैं। कई महिलाएं की छाती की पसलियां टूट गई हैं। पुरुष पुलिस कर्मी ने बंदूक के कुंद से मारा है। मुझे लगता है कि महिलाएं के साथ बर्बरता की गई है। जालिया वाला बाग में जिस तरीके से जनरल डायर ने गोलियां चलवाई थी, वैसे ही बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया है।
बताते चलें कि, भारतीय जनता पार्टी ने आज बिहार सरकार के खिलाफ धरना दिया है। गुरुवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में धरना दिया गया। पार्टी अपने नेता विजय सिंह की मौत के लिए पुलिस और सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है।










