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बिहार में सड़क हादसों के बाद जब्त वाहन 24 घंटे में होंगे रिलीज, नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज

-बिहार में सड़क हादसों के बाद जब्त वाहन 24 घंटे में होंगे रिलीज, नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी तेज

पटना। बिहार में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हादसों के बाद महीनों तक थानों में खड़ी रहने वाली जब्त गाड़ियों के मालिकों को जल्द राहत मिलने वाली है। नई व्यवस्था के तहत सड़क दुर्घटना में जब्त किए गए वाहनों को 24 घंटे के भीतर उनके मालिकों को वापस करने की तैयारी की जा रही है।

पुलिस मुख्यालय ने इस नई प्रणाली को लागू करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य लोगों को थाने और कोर्ट के लंबे चक्कर से राहत दिलाना है। अब तक सड़क हादसे के बाद पुलिस वाहन को जब्त कर थाने ले जाती थी, फिर केस दर्ज होने, जांच और कोर्ट के आदेश की प्रक्रिया पूरी होने में एक महीने से लेकर छह महीने तक का समय लग जाता था। इस दौरान वाहन थानों में खड़े-खड़े खराब हो जाते थे।

नई व्यवस्था के तहत हर जिले में डीएसपी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की जाएगी। वहीं राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। ट्रैफिक एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि कंट्रोल रूम के लिए मोबाइल नंबर 9031829356 जारी किया गया है, जिस पर व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सड़क दुर्घटना से जुड़ी प्रारंभिक जांच और कानूनी प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए तथा बिना वजह वाहनों को थाने में रोके न रखा जाए। यदि किसी मामले में वाहन को सबूत के तौर पर रखना आवश्यक होगा, तो उसका स्पष्ट कारण दर्ज करना होगा।

इधर सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती होने पर केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के तहत 1.50 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा अधिकतम सात दिनों तक मिलेगी। खास बात यह है कि जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि 24 घंटे के बाद भर्ती होने पर इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा।

बिहार में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे चिंता का विषय बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार राज्य में हर दिन औसतन 32 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। राजधानी पटना हादसों के मामले में सबसे ऊपर है, जहां हर वर्ष करीब 3 हजार सड़क हादसे दर्ज किए जाते हैं। पूरे बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लगभग 2200 लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे में सरकार की यह नई पहल आम लोगों के लिए बड़ी राहत और उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।