-फार्मर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से बटाईदार किसानों की खेती पर संकट
-खाद के लिए साइबर कैफे का चक्कर
मुजफ्फरपुर। उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए एक सितंबर से फार्मर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किए जाने के बाद बटाईदार और ठेका पर खेती करने वाले किसानों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं, जिन किसानों का अब तक फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है, उन्हें भी उर्वरक खरीदने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
पहले कालाबाजारी के कारण खाद के लिए किसानों को परेशानी होती थी, अब नए नियम ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उर्वरक दुकानों पर पहले जैसी लंबी कतारें तो नहीं दिख रही हैं, लेकिन किसान फार्मर आईडी बनवाने के लिए साइबर कैफे का चक्कर लगा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कई जगह फार्मर आईडी बनाने के नाम पर मनमानी राशि वसूली जा रही है।
किसान राज किशोर सिंह ने बताया कि नए नियम के कारण उर्वरक खरीदने में काफी परेशानी हो रही है। खासकर बटाईदार किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कालाबाजारी रोकने के लिए नियम लागू करना सही है, लेकिन फिलहाल इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बटाई और ठेका पर खेती करने वाले किसानों के पास जमीन का स्वामित्व नहीं होता, जिसके कारण उनके लिए फार्मर रजिस्ट्रेशन कराना मुश्किल है। यह गंभीर समस्या बन गई है।

बटाईदार किसान नवल सहनी ने बताया कि वह ठेका पर खेत लेकर सब्जी की खेती करते हैं। फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण उर्वरक खरीदने में काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि किसी तरह 266 रुपये वाली यूरिया की बोरी 350 रुपये और डीएपी की बोरी 2200 रुपये में खरीदनी पड़ी। अब आगे की खेती के लिए उर्वरक की व्यवस्था कैसे होगी, इसे लेकर चिंता बढ़ गई है।
किसान सच्चिदानंद सिंह ने बताया कि खेतों में अभी धान और सब्जी की फसल लगी हुई है। पहले खाद की जरूरत के समय खरीदारी करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई, लेकिन अब कुछ और उर्वरक की आवश्यकता है। नए नियम लागू होने के बाद आसानी से खाद मिलना मुश्किल लग रहा है।
वहीं, उर्वरक विक्रेता राजीव कुमार ने बताया कि दुकान में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है, लेकिन नए नियम और तकनीकी समस्याओं के कारण बिक्री प्रभावित हो रही है। कभी सर्वर काम नहीं करता तो कभी किसानों का अंगूठा पीओएस मशीन पर सत्यापित नहीं हो पाता। इससे किसान के साथ-साथ दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।












