ग्रामीण करेंगे वोट बहिष्कार, रोड नहीं तो वोट नहीं, सैकड़ों महिलाओं ने सड़क पर उतरते हुए किया फ्लैग मार्च
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देश की आजादी के 77 वर्षों बाद भी पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में एक ऐसा गांव है जहां अबतक विकास नहीं पहुंच सका है , लगभग दो हजार की निवास करने वाली आबादी वाले गांव में सड़क नहीं बनी सकी है । देश में विकास की तीव्र गति से हो रहे विकास की दावे करती हुई अपने बीते 10 वर्षों की NDA कि मोदी सरकार एवं बिहार में 15 वर्षों से लगभग शासन कर रही एनडीए की डबल इंजन की सरकार नहीं थकती है। लेकिन वहा के भोले भाले ग्रामीणों का भला कसूर रहा है जोकि सड़क बिजली, पानी जैसे बुनियादी सुविधाओं से अबतक उन्हें मरहूम रखा गया। वहां के सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं ने सड़क पर उतरते हुए आर पार लड़ाई कि ऐलान करते हुए अपने हाथों लिखे तखितियो को लेकर “रोड नहीं तो वोट नहीं “के नारे लगाते हुए लोकसभा चुनाव की बहिष्कार करने की ऐलान कर दिया।

जीहा हम बात कर रहे हैं पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र के पालीगंज विधानसभा क्षेत्र के घूरना बिगहा गांव की जहा पर देश की आजादी के 77 वर्ष बीतने के बावजूद भी आजतक उनके बुनियादी मूलभूत सुविधाओं में से एक सड़क जोकि सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण होती है वो नहीं बन पाई है। लगभग एक हजार मतदााओं के साथ कुल 2 हजार आबादी वाले इस गांव के भोले भाले ग्रामीणों की अबतक क्या कसूर रही है जिन्हे अबतक दूर रखा गया। वैसे तो इस गांव पिछड़े वर्ग में यादव, महादलित वर्ग से रविदास, अति पिछड़े से,ठाकुर , ताती जैसे आधा दर्जन भर कई वर्ग के लोग रहते हैं। महज 3 सौ मीटर तक छुट्टी सड़क को सरकार नहीं जोड़ पा रही है ।
जिहा इस गांव की भगोलिक तस्वीरें यह है यह गाव के चारो तरफ मुख्य सड़कों की जाल बिछा है , बाद बीच में यह अछूत सा बना हुआ गांव किसी अनाथ बच्चे की तरह पड़ा हुआ दिखाई देता है । पालीगंज अनुमंडल मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर की दूरी होगी। इस गांव चारो तरफ से सड़के बनी हुई है ।NH:-139 पटना – औरंगाबाद मुख्य मार्ग से सेट सियारामपुर गांव को जाने वाली सड़क से घूरना बिगहा गांव को जाने वाली सड़क की दूरी महज ढाई किलोमीटर की है। गांव से मुख्य सड़क तक 20 वर्ष पूर्व स्थानीय तात्कालिक विधायक रहे इनके नंद के कार्यकाल में यह सड़कों का निर्माण शुरू हुआ था लेकिन दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति के कारण गांव से आगे की ओर मुख सड़कों तक सड़के तो बनी लेकिन मुख्य सड़क से 300 मीटर की दूरी तक नहीं जुड़ पाई। जिसका मुंह कारण था कुछ किसानों के बगल के गांव के ही कुछ किसानों की जमीन पड़ रही थी जिनके अवरोध और विरोध करने के बाद यह सड़क नहीं बन पाई थी जिसके कारण आज तक क्या सड़क आदि अधूरी पड़ी हुई है इस दौरान लगभग कई विधायक और संतों का कार्यकाल बिक चुके लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल किसी भी जनप्रतिनिधियों द्वारा या सांसद हो या विधायक हो ठोस प्रयास नहीं किया गया इच्छा शक्ति के अभाव में सड़क आज भी आधी अधूरी बनी जब भी इस गांव में कभी कोई बीमारी आपात स्थिति उत्पन्न होती हैतो इलाज के लिए मां 7 किलोमीटर की दूरी अनुमंडल अस्पताल पालीगंज आने के लिए उन्हें 1000 बार सूचना पड़ता है क्योंकि सब कोजैसे बुनियादी सुविधाओं की नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है गर्मी के दिनों में तो किसी तरह काम चल जाता है लेकिन जब बरसात और सर्दियों का मौसम आता है चारों तरफ पानी भर जाती है जिसके कारण यह गांव मुख्य धारा से कट सा जाता हैऔर उसे स्थिति में जब इस गांव में किसी भी तरह के आकस्मिक विपदा आती है या किसी भी बड़ी बीमारियों से लोग ग्रस्त होते हैं तो उन्हें 1000 बार सूचना पड़ता है काफी अधितकतों का जाना पड़ता है किसी तरह घटिया प्रहलाद का मरीज को नुकसान तक लाते हैं और इसके बाद अस्पताल तक पहुंचाते हैं देश की आजादी केकितने वर्ष भी जाने के बाद एक तरफ हम लोग विकसित होने की दावे करते हैं तो दूसरी तरफ यह काम आज भी विकास कोष दूर है क्या इस गांव के ग्रामीणों का इतना ही कसूर है जो वह आवाज नहीं उठा पाए या उनकी शालीनता और शालीनताकी वजह से यहां की जनप्रतिनिधि उन्हें ध्यान नहीं देते आपकी किस कारण की वजह से यह सड़क आज भी आधी अधूरी छोड़ता पड़ा है जो किया काफी दुखद और दयनीय स्थिति बया करता है।












