-निराला निकेतन में महावाणी स्मरण सह काव्य गोष्ठी आयोजित, पर्यावरण दिवस पर हुआ पौधारोपण
मुजफ्फरपुर। निराला निकेतन में आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की प्रतिमा स्थल पर महावाणी स्मरण सह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. उषा किरण श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन डॉ. संगीता सागर ने किया।
काव्य गोष्ठी में विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। डॉ. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने ‘बीतल पुरना वरीस नया सुरूज उगल’, अंजनी कुमार पाठक ने ‘ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाओ’, अरुण कुमार तुलसी ने ‘सुहाने जिंदगी की रंगभरी शाम’, प्रमोद नारायण मिश्र ने ‘दिल रोता है मैं हंसता हूं’ तथा सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने ‘पिया जब दुल्हा बनी दुअरिया’ शीर्षक रचनाओं का पाठ किया।
इसके अलावा डॉ. संगीता सागर ने ‘मेरे गांव में था एक इमली का पेड़’, डॉ. उषा किरण श्रीवास्तव ने ‘अपनी फुलवारी में मैंने तरह-तरह के फूल लगाए’ तथा अशोक भारती ने ‘धूप पर जब भी लिखोगे बात चांदनी की होगी’ कविता प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कार्यक्रम के दौरान निराला निकेतन परिसर में डॉ. उषा किरण श्रीवास्तव के नेतृत्व में पौधारोपण भी किया गया। उपस्थित साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. संगीता सागर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी कवियों, साहित्यप्रेमियों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साहित्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से परिपूर्ण यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।












